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सबरीमाला/ मंदिर में प्रवेश का इतिहास रचने से 500 मीटर दूर रह गईं दो महिलाएं, विरोध के बाद लौटना पड़ा

कविता जक्कल को पुलिस सुरक्षा दी गई।

  • पत्रकार कविता जक्कल और सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा ने पुलिस सुरक्षा में मंदिर में जाने की कोशिश की, 150 जवान साथ थे
  • कोच्चि में लोगों ने रेहाना के घर पर तोड़फोड़ की
  • 10 से 50 साल की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर 800 साल से रोक
  • सुप्रीम कोर्ट ने यह रोक हटाई, लेकिन महिलाओं को रोकने के लिए तीन दिन से प्रदर्शन जारी

Dainik Bhaskar

Oct 19, 2018, 02:53 PM IST

पत्तनमतिट्टा. केरल के 800 साल पुराने सबरीमाला मंदिर में 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल की महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने को कहा है, लेकिन स्थानीय लोग इसके पक्ष में नहीं हैं। शुक्रवार को दो महिलाएं मंदिर में प्रवेश का इतिहास रचने से तब चूक गईं, जब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें 500 मीटर दूर रोक दिया। दोनों महिलाओं को 150 जवानों की सुरक्षा और आईजी के नेतृत्व में हेलमेट पहनाकर मंदिर ले जाया जा रहा था, लेकिन तेज विरोध के चलते उन्हें लौटना पड़ा। 

 

 

 

पुलिस ने कहा- हम टकराव नहीं चाहते
इन महिलाओं में एक हैदराबाद की पत्रकार कविता जक्कल हैं और दूसरी कोच्चि की रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा हैं। केरल पुलिस के आईजी श्रीजीत ने कहा, ‘‘पुलिस सबरीमाला में किसी तरह का टकराव नहीं चाहती, खासकर श्रद्धालुओं के साथ तो बिलकुल नहीं। पुलिस केवल कानून का पालन कर रही है। हम दोनों महिलाओं को दर्शन कराने के लिए लेकर गए थे, लेकिन पुजारियों ने मंदिर में प्रवेश देने से मना कर दिया। उन्होंने मुझे बताया कि अगर हमने मंदिर आने की कोशिश की तो वे मंदिर को बंद कर देंगे।’’

 

पुजारी ने कहा- मंदिर में ताला लगा देंगे

सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी कंडारू राजीवारू ने आईजी के बयान की पुष्टि की और कहा कि अगर महिलाएं जबर्दस्ती प्रवेश करने की कोशिश करेंगी तो हम मंदिर को ताला लगाकर चाबी सौंप देंगे। हम श्रद्धालुओं के साथ हैं। हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। 

 

महिलाओं ने कहा- श्रद्धालु नहीं, दूसरे लोग कर रहे विरोध

रेहाना ने कहा- ‘‘हमारा विरोध श्रद्धालु नहीं कर रहे, बल्कि दूसरे लोग कर रहे हैं जो शांति में अवरोध पैदा करना चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि विरोध की वजह क्या है। श्रद्धालु होने की क्या शर्तें हैं?’’ कविता ने कहा, ‘‘हमारा सपोर्ट करने वाले लोगों का हम शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। हमें यहां आकर गर्व महसूस हो रहा है, क्योंकि सबरीमाला मंदिर के आसपास की स्थिति खतरनाक है।’’

 

महिला के घर में तोड़फोड़
इस बीच, रेहाना फातिमा के सबरीमाला मंदिर के करीब पहुंचने से गुस्साए कुछ लोगों ने काेच्चि में उनके घर में तोड़फोड़ कर दी। उनके घर के शीशे तोड़ दिए गए और सामान निकालकर बाहर फेंक दिया गया।

 

 

'सामाजिक कार्यकर्ता प्रवेश करने की कोशिश में' : राज्य देवास्म (धार्मिक ट्रस्ट) मंत्री के सुंदरन ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता जैसे कुछ लोग ही मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि श्रद्धालु कौन है और सामाजिक कार्यकर्ता कौन है? उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि वहां दो महिलाएं हैं, जिनमें एक पत्रकार है।

 

 

800 साल से जारी प्रथा : सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी। यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। प्रथा 800 साल से चली आ रही थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया था।

 

हर साल 5 करोड़ लोग करते हैं दर्शन :  सबरीमाला मंदिर पत्तनमतिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्वक्षेत्र में है। 12वीं सदी के इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है। मान्यता है कि अय्यपा, भगवान शिव और विष्णु के स्त्री रूप अवतार मोहिनी के पुत्र हैं। दर्शन के लिए हर साल यहां करीब पांच करोड़ लोग आते हैं।

कविता जक्कल और रेहाना फातिमा को रास्ते में विरोध झेलना पड़ा।
बुधवार शाम 5 बजे खोले गए थे मंदिर के द्वार।
सुहासिनी राज और उनके साथी पत्रकार। इन्हें भी विरोध झेलना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्यभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन।
हजारों श्रद्धालु भगवान अयप्पा के दर्शनों के लिए पहुंचे।
महिलाओं के प्रवेश के फैसले के खिलाफ हजारों महिला श्रद्धालु भी सड़कों पर।
मंदिर में दर्शन करने के लिए लाइन में लगे श्रद्धालु।

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