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सबरीमाला/ एयरपोर्ट से ही लौटेंगी तृप्ति, अदालती फैसला लागू करने के लिए अौर वक्त चाहता है प्रबंधन

तृप्ति देसाई ने कहा कि मंदिर जाने के विरोध में उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है।

  • शुक्रवार को 2 महीने के लिए सबरीमाला के पट खोले गए, इस दौरान सालाना पूजा होगी
  • भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक तृप्ति देसाई केरल पहुंची, विरोध के चलते एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकल पाईं
  • मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केरल सरकार ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जो विफल रही

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2018, 07:49 PM IST

तिरुवनंतपुरम. सबरीमाला मंदिर के पट शुक्रवार शाम खोल दिए गए। यहां 62 दिनों तक वार्षिक पूजा ‘मंडाला मक्काराविल्लाक्कू’ होगी। मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की बात केरल सरकार ने कही थी। लेकिन, प्रतिबंधित उम्र की कोई महिला शुक्रवार को मंदिर तक नहीं पहुंच पाई। इस बीच मंदिर का प्रबंधन देखने वाले त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बनाया है। बोर्ड अदालत का फैसला लागू करने के लिए और वक्त की मांग करेगा।

 

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भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक तृप्ति देसाई सात महिलाओं के साथ शुक्रवार तड़के केरल पहुंचीं। उनके आने की खबर लगते ही प्रदर्शनकारी रात से ही कोच्चि एयरपोर्ट के बाहर डट गए। भारी विरोध के चलते तृप्ति के साथ पुणे से आई कोई महिला बाहर नहीं निकल पाई। तृप्ति ने कहा कि पुलिस ने उनसे पुणे वापस लौट जाने को कहा है। विरोध को देखते हुए तृप्ति ने पुणे लौटने का फैसला किया। हालांकि, पहले वह कह रही थीं कि मंदिर में दर्शन के बगैर वापस नहीं जाएंगी।

 

विरोधियों ने कहा- दर्शन करना है तो सीने पर पैर रखकर जाएं

प्रदर्शन में शामिल भाजपा नेता एमएन गोपी ने कहा कि हम तृप्ति देसाई और उनके साथियों को पुलिस या सरकारी गाड़ी में नहीं जाने देंगे। सामाजिक कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने कहा कि तृप्ति देसाई को वापस जाना होगा। अगर उन्हें सबरीमाला में दर्शन करना है तो हमारे सीने पर पैर रखकर आगे बढ़ जाएं।

 

सर्वदलीय बैठक विफल रही

सबरीमाला विवाद पर चर्चा के लिए केरल सरकार ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसमें प्रस्ताव रखा था कि महिलाओं के मंदिर में दर्शन के लिए अलग दिन तय कर दिया जाए। हालांकि, ये बैठक विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के वॉकआउट के चलते विफल हो गई। राज्य सरकार ने गुरुवार रात से 7 दिनों के लिए 4 जगहों इलावुनकल, नीलक्कल, पंबा और शनिदानम में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है।

 

कोर्ट के आदेश के बाद तीसरी बार खुला मंदिर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब तक सबरीमाला मंदिर के पट तीसरी बार खोले गए हैं। लेकिन, हिंसक विरोध के चलते कोई भी ऐसी महिला मंदिर में दर्शन करने नहीं जा सकी है, जिसकी उम्र 10-50 वर्ष के बीच हो।

 

श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हैं: केरल सरकार
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विपक्षी पार्टियों के वॉकआउट के बाद कहा- हम इस संभावना पर विचार कर रहे थे कि मंदिर में महिलाओं के दर्शन के लिए अलग दिन तय किया जाए। इसके लिए चर्चा की आवश्यकता थी। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिए फैसले में साफ कहा है कि सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिया जाए। राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ कोई भी कदम नहीं उठा सकती। हालांकि, हम श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हैं। 

 

वक्त की बर्बादी थी सर्वदलीय बैठक: भाजपा
विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक में मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को 22 जनवरी तक लागू ना किया जाए। क्योंकि, इसी दिन 28 सितंबर को दिए गए फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर कोर्ट को विचार करना है। नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्नीथला ने कहा- सरकार कोर्ट का फैसला लागू करने पर अड़ी हुई है और किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। ये श्रद्धालुओं के लिए एक चुनौती है। सबरीमाला धाम को कमजोर करने की कोशिश है। केरल भाजपा के चीफ पीएस श्रीधरन पिल्लई ने कहा की सर्वदलीय बैठक वक्त की बर्बादी थी।

कड़ी सुरक्षा के बीच श्रद्धालु शुक्रवार को मंदिर में दर्शन करने पहुंचे।
तृप्ति के आने की खबर लगते ही एयरपोर्ट के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी।
केरल सरकार ने कहा कि सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी। - फाइल
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