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स्टीव जॉब्स की स्पीच/ पढ़ाई छूट जाना या एपल से निकाला जाना; जो भी निगेटिव हुआ, सब अच्छा हुआ

Dainik Bhaskar | Jan 21, 2019, 01:03 PM IST

  • नया सीखना काम जरूर आता है, यह बात हमेशा फायदेमंद 
  • महान काम करने का सबसे अच्छा तरीका है अपने काम से प्यार 
  • एपल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स ने 2005 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में यह स्पीच दी थी

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2019, 01:03 PM IST

न्यूयॉर्क. एपल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स ने बताया,  "मेरी बायोलॉजिकल मां कॉलेज ग्रेजुएट स्टूडेंट थीं। अविवाहित होने की वजह से उन्होंने मुझे गोद देने का फैसला लिया। लेकिन मेरी मां को पता चला कि मेरी नई मां कॉलेज ग्रेजुएट नहीं है और पिता ने तो हाई स्कूल भी पूरा नहीं किया है। उन्होंने अडॉप्शन पेपर्स पर हस्ताक्षर से इनकार कर दिया। फिर वे मेरे पैरेंट्स के इस वादे पर पिघलीं कि एक दिन उनका बेटा जरूर कॉलेज ग्रेजुएट होगा। 17 साल बाद मैं कॉलेज पहुंचा लेकिन, नादानी में बहुत महंगा कॉलेज चुन लिया। मेरे वर्किंग क्लास पैरेंट्स की पूरी कमाई और बचत मेरी ट्यूशन में जाने लगी। मैंने ड्रॉपआउट का फैसला किया। उस समय यह काफी डरावना लगा था, लेकिन आज लगता है यह मेरा सर्वश्रेष्ठ फैसला था।" 

 

" मैं एक दोस्त के कमरे में फर्श पर सोता था। खाने का इंतजाम करने के लिए मैं कोक की खाली बॉटल जमा करके बेचता था। हर रविवार रात सात मील चलकर हरे कृष्ण मंदिर तक पहुंचता था, क्योंकि वहां अच्छा खाना मिलता था। उस समय रीड कॉलेज में मैंने कैलीग्राफी सीखी। तब संभावना नहीं थी कि मेरे लिए इसकी व्यावहारिक उपयोगिता होगी। लेकिन दस साल बाद जब हम मैकिन्टौश कम्प्यूटर डिजाइन कर रहे थे तो यह हुनर काम आया। यह पहला कंप्यूटर था, जिसमें खूबसूरत टाइपोग्राफी थी।"  

 

"अगर मैं कॉलेज ड्रॉप आउट नहीं होता और कैलीग्राफी नहीं सीखता तो मैक में शायद सुंदर टाइपोग्राफी नहीं होती। कॉलेज में यह संभव नहीं था कि मैं भविष्य में देखकर इन डॉट्स को कनेक्ट कर पाता। इसलिए भरोसा रखें कि भविष्य में ज़िंदगी की असंबद्ध घटनाओं के डॉट्स कनेक्ट होंगे। आपको अपने दिल की आवाज, जीवन और कर्म पर भरोसा करना होता है। इस अप्रोच ने मुझे कभी निराश नहीं होने दिया।"  

 

एक ही चीज आगे बढ़ाती है, अपने काम से प्यार 
जॉब्स ने बताया, " जब मैं 20 साल का हुआ तो पैरेंट्स के गैराज में एपल शुरू की। दस साल में ही एपल दो लोगों से बढ़कर 4 हजार कर्मचारियों की कंपनी बन गई। तभी मुझे बाहर कर दिया गया। जब एपल तरक्की कर रही थी तो हमने ऐसे व्यक्ति को हायर किया जो कंपनी चलाने में बहुत प्रतिभाशाली था। पहले कुछ साल के बाद हमारे विचार भिन्न होने लगे, हम असफल होने लगे। बोर्ड डायरेक्टर्स उसके पक्ष में हो गए। लेकिन, निकाल दिया जाना मेरे लिए अच्छा रहा। अगले पांच साल में मैंने नेक्स्ट और पिक्सर कंपनियां शुरू कीं। उस शानदार महिला के साथ प्रेम में पड़ा, जो मेरी पत्नी बनी। एपल ने नेक्स्ट को खरीद लिया और मैं एपल में लौट आया। जो टेक्नोलॉजी हमने नेक्स्ट में डेवलप की थी वही एपल की क्रांति का कारण बनी। अगर मैं एपल से निकाला नहीं जाता तो ऐसा नहीं होता। अपने काम से प्यार ने मुझे हमेशा आगे बढ़ाया। अगर आपको अभी तक वह काम नहीं मिला है, जिसे आप प्यार करते हैं तो उसकी तलाश कीजिए।" 

 

दिल की आवाज और इंट्यूशन को सुनने की हिम्मत पैदा करें 
उन्होंने बताया, "17 साल की उम्र में मैंने एक कोट पढ़ा था- हर दिन को ऐसे जियो जैसे यह आपका आखिरी दिन है। तब से हर सुबह मैंं खुद से पूछता हूं- अगर आज मेरे जीवन का आखिरी दिन होता तो क्या मैं वह करना चाहता, जो करने जा रहा हूं। जब कई दिनों तक जवाब 'ना' में मिले तो समझ जाता हूं कि कुछ बदलने की जरूरत है। कोई भी मरना नहीं चाहता है पर हम सभी की आखिरी मंजिल वही है। आपके पास समय कम है, इसलिए किसी और का जीवन जीने में इसे जाया मत कीजिए। किसी और के विचारों को अपने अंतरमन की आवाज़ पर हावी मत होने दीजिए। दिल की आवाज और इंट्यूशन को सुनने की हिम्मत पैदा कीजिए।"

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