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अयोध्या विवाद/ सुप्रीम कोर्ट में 26 फरवरी को होगी सुनवाई, छुट्टी से लौटे जस्टिस बोबडे

Dainik Bhaskar | Feb 20, 2019, 04:23 PM IST
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर होगी होनी है सुनवाई
  • चीफ जस्टिसरंजन गोगोई ने इस मामले में सुनवाई के लिए नई बेंच बनाई थी

Dainik Bhaskar

Feb 20, 2019, 04:23 PM IST

अयोध्या. अयोध्या विवाद पर सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट कीपांच सदस्यीय संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एसए बोबडेछुट्टी से लौट आए हैं। ऐसे में अबइस केस की सुनवाई की तारीख26 फरवरी तय की गई है। यह सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर होनी है।इससे पहले मामले में 29 जनवरी को सुनवाई होनी थी, लेकिन उस दिन जस्टिस बोबडे उपलब्ध नहीं थे। इस कारण उस दिनसुनवाई टल गई थी।

10 जनवरी को पांचजजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की थी। इसमें जस्टिस यूयू ललित के अलावा, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे। लेकिन, कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने पांच जजों की बेंच में जस्टिस यूयू ललित के होने पर सवाल उठाया। इसके बाद जस्टिस ललित खुद ही बेंच से अलग हो गए।

25 जनवरी को नई बेंच बनाई गई थी

विवाद के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 25 जनवरी को अयोध्या विवाद की सुनवाई के लिए बेंच का पुनर्गठन किया। इसमेंजस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर को शामिल किया गया। नई बेंच में चीफ जस्टिस ने जस्टिसएनवी रमण कोशामिल नहीं किया। अब नई बेंच में चीफ जस्टिस के अलावाजस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण औरजस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला?
हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए। इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। शीर्ष अदालत ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में यह केस पिछले आठ साल से लंबित है।