विवाद / सुप्रीम कोेर्ट के जज बनाए गए जस्टिस माहेश्वरी-जस्टिस खन्ना, बार काउंसिल ने कहा- मनमाना फैसला

  • बार काउंसिल ने कहा- इस फैसले से गलत संदेश जाएगा, हम इसके खिलाफ धरना देंगे
  • पूर्व जस्टिस कैलाश गंभीर ने राष्ट्रपति को खत लिखा था, वरिष्ठता की अनदेखी पर चिंता जताई

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2019, 09:33 PM IST

नई दिल्ली. सरकार ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोनों की नियुक्ति को मंजूरी दी। सुप्रीम कोर्ट के 5 सदस्यीय कॉलेजियम ने 11 जनवरी को दोनों न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की अनुशंसा की थी। हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने इसका विरोध किया है। बीसीआई ने इसे मनमाना और एकतरफा फैसला बताया।

कॉलेजियम में चीफ जस्टिस रंजन गोगोईके अलावा जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रामन्ना और जस्टिस अरुण मिश्रा शामिल हैं।

बीसीआई ने कहा- फैसले आम आदमी की नजर में अन्यायपूर्ण

  1. बीसीआई ने कहा कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम का फैसला बार काउंसिल और आम आदमी की नजर में अन्यायपूर्ण और अनुचित है। हम इस फैसले का विरोध करते हैं।

  2. सीबीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा, "जनता इस फैसले को बर्दाश्त नहीं करेगी। जस्टिस प्रदीप नंद्राजोग और जस्टिस राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट भेजे जाने के पहले के फैसले को निरस्त करना मनमाना तरीका है। इन न्यायाधीशों के नाम पर किसी भी आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। ज्यादातर काउंसिल और एसोसिएशन ने इस फैसले के खिलाफ धरना देने का फैसला किया है।'

  3. जस्टिस कौल ने चीफ जस्टिस को लिखा खत

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल ने चीफ जस्टिस और कॉलेजियम के सदस्यों को खत लिखा। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम ने अपने फैसले में राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नंद्राजोग और दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मेनन की वरिष्ठता की अनदेखी की।

  4. सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस कौल का मानना था कि अगर जस्टिस खन्ना से ज्यादा वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी की जाएगी तो इससे गलत संदेश जाएगा।

  5. दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कैलाश गंभीर ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को 14 जनवरी को खत लिखा था। इसमें उन्होंने कॉलेजियम के फैसले पर चिंता जाहिर की थी।

  6. जस्टिस गंभीर ने कहा- पहली नजर में मुझे इस पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन यही सच था। दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस खन्ना से सीनियर तीन जज और हैं। ऐसे में उन्हें सुप्रीम कोर्ट भेजना गलत परंपरा की शुरुआत होगी।

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