सीएए / सुप्रीम कोर्ट ने कहा- देश मुश्किल दौर से गुजर रहा; जब हिंसा थमेगी, तब याचिका पर सुनवाई करेंगे

याचिका में कहा गया- अफवाहें फैलाने के लिए कार्यकर्ताओं, छात्रों और मीडिया पर कार्रवाई की जाए। -फाइल फोटो

  • एक वकील ने याचिका दायर कर नागरिकता संशोधन कानून को संवैधानिक करार देने और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहली बार कोई कानून को संवैधानिक करार देने की मांग कर रहा है, लेकिन हमारा काम सिर्फ वैधता जांचना है

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2020, 05:37 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर दायर याचिकाकी तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि देश अभी मुश्किलदौर से गुजर रहा है। जब हिंसा थमेगी, तब उन पर सुनवाई की जाएगी।

चीफ जस्टिस ने याचिकापर आश्चर्य जताते हुए यह भी कहा, ‘‘पहली बार है जब कोई देश के कानून को संवैधानिक करार देने की मांग कर रहा है, जबकि हमारा काम वैधता जांचना है।’’ बेंच में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे। उनके मुताबिक, ‘‘यह कोर्ट का काम है कि वह किसी कानून की वैधता की जांच करे। जब हिंसा का दौर थम जाएगा, तब कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करेंगे।’’

याचिका में कहा- अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई हो
यह मामला तब सामने आया, जब एडवोकेट विनीत ढांडा ने एक याचिका दायर करते हुए उसकी जल्द सुनवाई की मांग की थी। याचिका में कहा कि सीएए को वैध घोषित किया जाए। साथ ही राज्यों को भी निर्देश दिए जाएं कि वे कानून को लागू करें। याचिका में यह भी कहा गया कि अफवाहें फैलाने के लिए कार्यकर्ताओं, छात्रों और मीडिया पर भी कार्रवाई की जाए।

कानून के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए
दिसंबर में संसद में नागरिकता बिल पास होने के बाद से ही पूर्वोत्तर समेत देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए। इस दौरान 21 लोगों की जान गई। 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून पर 25 दिसंबर को लखनऊ में लोगों से अपील की। उन्होंने कहा- विपक्षी भ्रम फैला रहे हैं। लोगों को इस भ्रम में पड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए और सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उधर, एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा- नागरिकता संशोधन कानून में किसी की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है, नागरिकता देने का प्रावधान है। देश के मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है।

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