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यूआईडीएआई ने कहा- आधार के बायोमेट्रिक्स में शव के फिंगरप्रिंट का मिलान संभव नहीं

4 वर्ष पहले
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  • सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की याचिका पर कोर्ट ने मांगा था यूआईडीएआई से जवाब
  • यूआईडीएआई ने कहा- केवल अंगूठे के आधार पर पहचान होने में गड़बड़ी की आशंका
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नई दिल्ली. यूनीक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने दिल्ली हाईकोर्ट को सोमवार को बताया कि अज्ञात शव की पहचान के लिए आधार बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल संभव नहीं है। यूआईडीएआई ने चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की बेंच से कहा कि फिंगरप्रिंट और आईरिस जैसे बायोमेट्रिक का मिलान 1:1 आधार पर किया जाता है और इसके लिए आधार नंबर जरूरी होता है। शव के फिंगरप्रिंट का मिलान 120 लोगों के आधार बायोमेट्रिक डाटा से करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।

 

याचिका में कहा गया- जानकारी साझा करे यूआईडीएआई

  • हाईकोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। साहनी ने अपील की थी कि कोर्ट केंद्र और यूआईडीएआई को अज्ञात शवों की पहचान करने के लिए बायोमेट्रिक डाटा का इस्तेमाल करने के संबंध में निर्देश दे।
  • याचिका में कहा गया था कि यूआईडीएआई के पास आधार डाटा है तो उसे एनसीआरबी और राज्यों के साथ शेयर किया जाए, ताकि अज्ञात शवों की पहचान हो सके। 
  • अगर किसी अज्ञात शव के बायोमेट्रिक्स आधार के पास मौजूद हैं, तो उसे तुरंत अधिकारियों को शेयर करने के लिए निर्देश दिए जाएं, ताकि मृतक के परिवारवाले सम्मानपूर्वक शव का अंतिम संस्कार कर सकें। 
  • आधार डाटा बेस का इस्तेमाल कर लापता लोगों का भी पता लगाया जा सकता है, इस संबंध में भी कोर्ट निर्देश दे।
  • आधार एक्ट के तहत अज्ञात शवों के संबंध में मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का निर्देश दिया जाए, जो एक या दो दिन में मामले का निपटारा करे।

 

यूआईडीएआई ने कहा- ये तकनीकी रूप से संभव नहीं
यूआईडीएआई के वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि ये तकनीकी रूप से संभव नहीं है। हम इस संबंध में अधिकारियों को कैसे निर्देश दे दें। आधार से 120 करोड़ लोग जुड़े हैं। बायोमेट्रिक्स के मिलान के लिए सभी उंगलियों का फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन जरूरी होता है। अगर केवल अंगूठे के आधार पर मिलान किया जाएगा तो इस बात की संभावना ज्यादा है कि मिलान कई लोगों के साथ हो जाए। कोर्ट ने यूआईडीएआई से कहा था कि वह अपना जवाब पेश करे और ये भी बताए कि आधार डाटा बेस मौजूद होने पर इस तरह के मामलों में फिंगरप्रिंट की मिलान संभव क्यों नहीं है। अदालत ने इस याचिका पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से भी जवाब मांगा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी।

 

जांच अधिकारी ने भी मांगी थी फिंगरप्रिंट के मिलान की इजाजत
हुसैन ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के 12 अक्टूबर को दिए फैसले का भी जिक्र किया। एक जांच अधिकारी ने मृत महिला की पहचान करने के लिए उसके फिंगरप्रिंट का मिलान आधार डाटा बेस से करने की मांग की थी। यूआईडीएआई ने हाईकोर्ट को बताया था कि अभी हमारे पास मौजूद जानकारी में फिंगरप्रिंट का मिलान करना संभव नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी की याचिका खारिज कर दी थी।

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