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250 साल पुराने विश्व के सबसे विशालकाय बरगद की कहानी, तूफान आए, शाखाएं काटी गईं फिर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

Dainikbhaskar.com | Jul 26, 2018, 04:01 PM IST

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल इस पेड़ को द ग्रेट बनियन ट्री के नाम से भी जाना जाता है।

इस बरगद की 3,372 से अधिक जटाएं जड़ का रूप ले चुकी हैं।
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

- द ग्रेट बनियन ट्री :कोलकाता के द आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डेन में बोटेनिकल गार्डेन में 1787 में स्थापित किया गया।
- 13 लोगों की स्पेशल टीम करती है इसकी देखभाल, इसे बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया का प्रतीक चिन्ह बनाया गया है

लाइफस्टाइल डेस्क.वर्ल्ड रिकॉर्ड सिर्फ इंसान ही नहीं पेड़ भी बनाते हैं। 250 साल पुराना दुनिया का सबसे विशालकाय बरगद का पेड़ इसका उदाहरण है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल इस पेड़ को द ग्रेट बनियन ट्री के नाम से भी जाना जाता है। 1787 में जब इसे कोलकाता द आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डेन में बोटेनिकल गार्डेन में स्थापित किया गया, उस समय इसकी उम्र करीब 20 साल थी। जानते इसके इसकी पूरी कहानी....

10 प्वाइंट‌्स : कब, कैसे कितना बदला द ग्रेट बनियन ट्री

1-दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ 14,500 वर्ग मीटर में फैला है। दूर से देखने पर यह जंगल की तरह नज़र आता है। बरगद के पेड़ की शाखाओं से निकलने वाली जटाएं पानी की तलाश में जमीन में नीचे की ओर बढ़ती गईं और इस तरह यह जंगल में तब्दील होता गया।

2-इस बरगद की 3,372 से अधिक जटाएं जड़ का रूप ले चुकी हैं। 1884 और 1925 में आए चक्रवाती तूफानों ने इसे काफी नुकसान पहुंचाया था। इस दौरान कई शाखाओं में फफूंद लगने के कारण काट दी गई थीं। इसके बाद भी सबसे विशालकाय वृक्ष का रिकॉर्ड इसके नाम है।

3-जंगल जैसा स्वरूप होने के कारण यहां 87 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। जो पर्यटकों को खुशनुमा अहसास कराती हैं। इसकी सबसे ऊंची शाखा 24 मी. लंबी है। वर्तमान में जमीन तक पहुंचने वाली स्तंभ जड़ों की कुल संख्या 3,772 है।

4-इसकी विशालता कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसका नाम दर्ज है। इस विशाल बरगद के सम्मान में भारत सरकार ने साल 1987 में डाक टिकट जारी किया था और यह बरगद बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया का प्रतीक चिन्ह भी है।

5-इसे वॉकिंग ट्री भी कहते हैं। इसगार्डेन के केयर टेकर और सीनियर बॉटेनिस्ट एमयू शरीफके मुताबिक जिधर पॉल्यूशन अधिक होता है उधर इसकी ग्रोथ नहीं होती है। यह पूर्व की ओर बढ़ रहा है। सुबह-सुबह सूर्य की ओर से आने वाली किरणों की तरफ इसकी ग्रोथ अधिक देखी गई है।

6-एमयू शरीफ के अनुसार 1985 में इसे चारों ओर फेंसिंग की गई थी। कुछ सालों बाद इसकी ग्रोथ के डायरेक्शन के बारे में पता चला जब इसकी शाखाएं पूर्व की ओर अधिक फैलीं।

7-सीनियर बॉटेनिस्ट बसंत सिंहके अनुसार इसकी देखभाल के लिए करीब 13 ट्रेंड लोगों को नियुक्त किया गया है। जिसमें चार सीनियर बॉटेनिस्ट और अन्य ट्रेंड माली हैं।

8-एमयू शरीफ के मुताबिक पूरी टीम के लिए बड़ा चैलेंज है इसे संभालना क्योंकि इसकी शाखाएं नीचे की ओर बढ़ रही हैं। इसकी ग्रोथ एक ओर अधिक हो रही है ऐसे में इसे बैलेंस सीधा रखना बड़ी चुनौती है।

जंगल जैसा स्वरूप होने के कारण यहां 87 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। जो पर्यटकों को खुशनुमा अहसास कराती हैं।
इस गार्डेन के केयर टेकर और सीनियर बॉटेनिस्ट एमयू शरीफ के मुताबिक पूरी टीम के लिए बड़ा चैलेंज है इसे संभालना क्योंकि इसकी शाखाएं नीचे की ओर बढ़ रही हैं। इसकी ग्रोथ एक ओर अधिक हो रही है ऐसे में इसे बैलेंस सीधा रखना बड़ी चुनौती है।
सीनियर बॉटेनिस्ट बसंत सिंह के अनुसार इसकी देखभाल के लिए करीब 13 ट्रेंड लोगों को नियुक्त किया गया है। जिसमें चार सीनियर बॉटेनिस्ट और अन्य ट्रेंड माली हैं।