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नरेंद्र मोदी के दिलचस्प किस्से - एक्टर बनना चाहते थे नरेंद्र मोदी, इस नाम से थी चिढ़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े ये कुछ ऐसे दिलचस्प किस्से हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे।

dainikbhaskar.com | Sep 15, 2017, 03:05 PM IST
अपना 67वां जन्मदिन मना रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का डंका आज पूरी दुनिया में बज रहा है। उनकी शख्सियत ऐसी है कि हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है, उनकी छोटी-छोटी बातों को भी अपनी जिंदगी में उतार लेना चाहता है।   गुजरात के छोटे से गांव में जन्मे नरेंद्र दामोदारदास मोदी के बारे में किसने सोचा था कि वो एक दिन देश पर भी ही नहीं पूरी दुनिया पर छा जाएंगे। मोदी की जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही।   एक नजर नरेंद्र मोदी  जिंदगी पर और उन्के जन्म से जुड़े कुछ मजेदार किस्सों पर जो शायद ही कोई जानता होगा   गुजरात के 2500 साल पुराने वाडनगर नाम के एक छोटे से गांव में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ। भले ही ये गांव छोटा सा हो, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है। सातवीं सदी में भारत के दौरे पर आए चीनी स्कॉलर हुआन सेंग ने भी वाडनकर और उसकी पृष्ठभूमि की तारीफ की। नरेंद्र मोदी के छह भाई-बहन थे जिनमें वो तीसरे नंबर पर थे। घर की हालत सही नहीं थी और इसके लिए उनके पिता को वाडकर रेलवे स्टेशन पर चाय तक बेचनी पड़ी। इसमें नरेंद्र मोदी भी मदद करते थे और ट्रेन में उन्होंने चाय बेची। जी हां, ये वही चाय का किस्सा है जिसके बारे में विदेशों तक खबर पहुंची कि एक चायवाला भारत का प्रधानमंत्री बन गया। विरोधी दलों के नेताओं तक ने मोदी का मजाक उड़ाया लेकिन बाद में मोदी की सफलता के बाद चाय और चाय पर चर्चा तक शुरू हो गई। आमतौर पर जैसे आपका-हमारा निकनेम होता है वैसे ही नरेंद्र मोदी का भी था। बचपन में नरेंद्र मोदी को सभी लोग नरिया कहकर बुलाते थे। हालांकि उन्हें इस नाम का बुरा भी लगता था लेकिन उन्होंने कभी पलटकर कुछ नहीं कहा। कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी की मां आज भी उन्हें प्यार से नरिया ही कहकर बुलाती हैं। पढ़ाई के मामले में नरेंद्र मोदी औसत रहे, हालांकि उनके डिबेट करने के अंदाज को टीचर्स से लेकर उनके दोस्तों तक ने सराहा। नरेंद्र मोदी को एक्टिंग का बहुत शौक था और इसीलिए उन्होंने थियेटर भी जॉइन किया। उनकी कई तस्वीरें इस बात की गवाह हैं कि वो थिएटर और नाटकों में काफी दिलचस्पी लिया करते थे। स्कूल की पढ़ाई के बाद नरेंद्र मोदी पर के दिल में संन्यासी बनने की चाह उठी। वो इस चक्कर में घर से ही भाग गए और इस दौरान उन्होंने  पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम के अलावा कई और जगहों का भ्रमण किया। इस दौरान उनकी आध्यात्म और तर्क में आस्था बढ़ी। बचपन में नरेंद्र मोदी बेहद शरारती थे, लेकिन दयालु भी बहुत थे। किसी को भी वो मुसीबत में देखते तो तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते। एक बार 'मन की बात' प्रोग्राम में मोदी ने खुलासा भी किया था कि किस तरह बचपन में शहनाई बजाने वालों को इमली का लालच देकर उनका ध्यान भंग किया करते थे। लोग अक्सर इस बात का मजाक उड़ाते रहे हैं कि मोदी खुद को गरीब बताते हैं, जबकि ये सच है। ना सिर्फ मोदी के पिता चाय बेचते थे बल्कि उनकी मां को भी लोगों के घरों में जाकर बर्तन साफ करने पड़े। बचपन में नरेंद्र मोदी की सगाई पड़ोस में रहने वाली जशोदाबेन से तय कर दी गई, लेकिन मोदी पर देश सेवा करने का फितूर था। वो घर की जिम्मेदारी में ना बंधकर अपना देश सेवा का सपना पूरा करना चाहते थे। उन्होंने वो शादी ठुकरा दी और साथ ही घर भी छोड़ दिया। जशोदा बेन को आज तक इस बात का ऐतराज नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने उनका साथ छोड़ा बल्कि उन्हें गर्व है कि नरेंद्र मोदी ने देशसेवा के लिए अपनी शादी का त्याग किया।
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