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इस माता के सामने मुगल बादशाह था नतमस्तक, इस तरह जुड़ी है मान्यता

4 वर्ष पहले
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जयपुर.    राजस्थान में देवी मां का एक ऐसा मंदिर है, जहां मां भक्तों के हाथों से प्रसाद के रूप में शराब पीती हैं। जीण माता का ये मंदिर सीकर जिले में है। जयपुर से इसकी दूरी करीब 120 किलोमीटर के करीब है। कहा जाता है कि जीण माता के इस मंदिर को तुड़वाने के लिए औरंगजेब ने सैनिक भेजे थे, लेकिन वे ऐसा कर पाने में सफल नहीं हो सके। 21 सितंबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस मौके पर DainikBhaskar.com बता रहा है जीण माता के जुड़ी मान्यता। बहन को मनाने भाई बैठ गया था तपस्या पर...

- मान्यता है कि जीण का जन्म घांघू गांव के एक चौहान वंश के राजा घंघ के घर में हुआ था।
- उनका एक बड़ा भाई भी था हर्ष। जीण और हर्ष, दोनों भाई बहनों में बहुत प्रेम था। जीण को शक्ति और हर्ष को भगवान शिव का रूप माना गया है। 
- एक बार जीण अपनी भाभी के साथ पानी भरने सरोवर पर गई हुई थी। दोनों में इस बात को लेकर पहले तो बहस हो गई कि हर्ष सबसे ज्यादा किसे मानते हैं। 
- दोनों में शर्त लग गई जिसके सिर पर रखा मटका हर्ष पहले उतारेगा, उससे पता चल जाएगा कि हर्ष किसे सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं। 
- इसके बाद दोनों हर्ष के सामने पहुंची। हर्ष ने सबसे पहले अपनी पत्नी के सिर पर रखा मटका उतारा। जीण शर्त हार गई। 
- इससे नाराज होकर जीण अरावली के काजल शिखर पर बैठी गई और तपस्या करने लगी। हर्ष मनाने गया, लेकिन जीण नहीं लौटी और भगवती की तपस्या में लीन रही।
- बहन को मनाने के लिए हर्ष भी भैरों की तपस्या में लीन हो गया। मान्यता है कि अब दोनों की तपस्या स्थली जीणमाता धाम और हर्षनाथ भैरव के रूप में जानी जाती है।

औरंगजेब ने भी मान ली थी हार...

- इस मंदिर को तुड़वाने के लिए एक बार मुगल बादशाह औरंगजेब ने हमला किया। उसने अपने सैनिकों को भेजा था। इन सैनिकों को देखकर गांव वाले बुरी तरह डर गए। इसके बाद उन्होंने सैनिकों से मंदिर न तोड़ने की गुहार लगाई। लेकिन जब बात नहीं बनी तो मंदिर में माता की आराधना करने लगे। 
- मान्यता है कि गांव वालों की प्रार्थना को जीण माता ने सुन लिया था। उन्हीं के प्रताप से मंदिर तोड़ने आए सैनिकों पर मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा। इससे घबराए सैनिक वहां से भाग खड़े हुए। इसके बाद से लोगों की श्रद्धा इस मंदिर पर और भी बढ़ गई। 
- कहा जाता है कि एक बार औरंगजेब बुरी तरह बीमार पड़ गया था। अपनी हरकतों पर अफसोस जताते हुए वो माफी मांगने जीण मंदिर पहुंचा। उसने यहां जीण माता से माफी मांगी और एक अखंड दीपक के लिए हर महीने सवा मन तेल चढ़ाने का वचन दिया। तभी से मुगल बादशाह की इस मंदिर में आस्था हो गई। 
 
जीण माता मंदिर में नवरात्र मेला...
- जीण माता मंदिर में हर वर्ष चैत्र सुदी एकम् से नवमी तक और आसोज सुदी एकम् से नवमी में दो मेले लगते है। इसमें लाखों संख्या में श्रद्धालु आते हैं। 
- जीणमाता मेले के अवसर पर राजस्थान के बाहर से भी लोग आते हैं। मेला लगने पर मंदिर के बाहर सपेरे मस्त होकर बीन बजाते हैं। 
- राजस्थान के सुदुर इलाकों से आये बालकों का झडूला (केश मुण्डाना) उतरवाते हैं। रात्रि जागरण करते हैं और दान देते है। मंदिर में बारहों मास अखण्ड दीप जलता रहता है।
 
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