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लेटर पॉलिटिक्स/ अब अजाक्स ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्‌ठी, कहा- सवर्ण अफसरों को रिटायरमेंट के बाद भी मलाईदार पद दे दिए



अारोप: एससी-एसटी का हक मारकर दिया लाभ ; इससे पहले सपाक्स भी आयोग से कर चुका शिकायत

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:19 AM IST

भोपाल.  प्रदेश में ब्यूरोक्रेट्स के बीच भी जातीय संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है। चार दिन पहले सपाक्स संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने मंत्रालय में पदस्थ ब्यूरोक्रेटस पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए पत्र लिखा था। इसके जवाब में अब अजाक्स ने भी पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा है कि एससी-एसटी वर्ग के अफसरों का हक मारकर सवर्ण वर्ग के अफसरों को रिटायरमेंट के बाद भी मलाईदार पदों पर संविदा नियुक्ति दी जा रही है।

 

अजाक्स ने सड़क निर्माण से जुड़े विभागों में पदस्थ चार अफसरों की शिकायत चुनाव आयोग और मुख्य सचिव को की है। पत्र में कहा गया है कि इन अफसरों को संविदा पर मुख्य अभियंता जैसे पदों पर कई साल से बरकरार रखा गया है। पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि यह अफसर जातिगत भेदभाव करते हैं।  अजाक्स का यह पत्र चुनाव आयोग के अलावा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव बीपी सिंह को भी भेजा गया है।  

 

 

एससी-एसटी के अफसरों को जानबूझकर नहीं दिया प्रमोशन : शिकायत में कहा कि ये चारों अफसर सामान्य वर्ग के हैं। इनके अधीनस्थ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सैकड़ों कर्मचारी कार्यरत है। इनको रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्ति देकर अजा-जजा वर्ग के योग्य अफसरों को वंचित किया गया है।

 

राज्य शासन के प्रमुख पद पर बैठे कुछ आला अफसर नियुक्ति बढ़ाने की एवज में सालाना 50 लाख रुपए लेते है। पत्र में ये भी लिखा गया है कि अजाक्स कार्यकर्ता की हैसियत से इसे लिखा गया है। अगर नाम लिखा गया तो वह सवर्ण अफसरों की आंखों में चुभेगा।

 

अफसर रिटायर हो गए, लेकिन अब भी पद पर डटे हैं : 1. लोक निर्माण विभाग से 8 साल पहले मुख्य अभियंता के पद से रिटायर हुए एएस चेंडके को एमपीआरडीसी में तकनीकी सलाहकार के पद पर नियुक्ति दे दी गई है। 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर इन्हें समान पद पर आज तक संविदा पर निरंतर रखा जा रहा है।

 

2.मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग और मध्यप्रदेश राज्य सड़क विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर रहे आलोक चतुर्वेदी की सेवाएं एमपीआरडीसी, भोपाल में समाहित की गई। लगभग दो साल पहले रिटायर हुए चतुर्वेदी को उसी दिन से मुख्य अभियंता के पद पर पुन: नियुक्ति दे दी गई।  

 

3. एमपीआरडीसी, भोपाल से दो साल पहले रिटायर हो चुके एम के आचार्य को मुख्य अभियंता के पद पर ही वापस नियुक्ति दे दी गई। रिटायरमेंट के बाद भी वे वर्तमान में उसी पद पर कार्यरत हैं।

 

4. शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग से प्रमुख अभियंता के पद पर दो साल पहले रिटायर हुए प्रभाकांत कटारे भी रिटायरमेंट के बाद प्रमुख अभियंता बने हुए हैं। इन्हें भी सरकार ने संविदा नियुक्ति देकर प्रमुख अभियंता के पद से नवाजा है।

 

सपाक्स का आरोप- कंसोटिया सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के अवकाश मंजूर नहीं करते : सपाक्स के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने लिखा था कि आईएएस इकबाल सिंह बैस और अजाक्स के अध्यक्ष जे एन कंसोटिया के सरंक्षण में अफसरों का गुट जातिवाद फैला रहा है। त्रिवेदी ने सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल एवं प्रमुख सचिव रश्मि शमी पर भी आरोप लगाए थे कि वे जातिगत भेदभाव के आधार पर कार्रवाई करते हैं। 

 

सबके अपने-अपने तर्क

- सपाक्स सरंक्षक का कोई पत्र मुझे नहीं मिला है। ये केवल मीडिया में ही चल रहा है। जब कुछ पता नहीं है तो भेदभाव के बारे में क्या कहूं। अजाक्स के पत्र के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। - जेएन कंसोटिया, अध्यक्ष, अजाक्स 

 

मैंने जो पत्र लिखा था, उसमें तथ्य भी लिखे हैं।  अजाक्स का पत्र गुमनाम तरीके से लिखा गया है तो इसकी कोई राजनीतिक वजह भी हो सकती है। इस विषय में अभी मुझे कोई जानकारी नहीं है। - हीरालाल त्रिवेदी, संरक्षक, सपाक्स

 

- शिकायत मुझ तक नहीं पहुंची है। आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि रिटायरमेंट के बाद संविदा पर पदस्थ अधिकारियों को किसी भी तरह के चुनाव कार्य में नहीं लगाया जाएगा। - वीएल कांताराव, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश

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