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शौकीन अटलजी को ग्वालियर का चिवड़ा और मथुरा के पकौड़े थे पसंद, उनके खानपान से जुड़े 4 किस्से

ग्वालियर शहर के शिंदे की छावनी में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे पसंदीदा मिठाई 'बहादुरा के लड्डू' और चिवड़ा नमकीन था।

Dainikbhaskar.com | Aug 16, 2018, 03:49 PM IST

हेल्थ डेस्क. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत बेहद नाजुक है। एम्स दिल्ली में भर्ती है। निजी जिंदगी में वे खाने-पीने के बेहद शौकीन रहे हैं। ग्वालियर शहर के शिंदे की छावनी में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे पसंदीदा मिठाई 'बहादुरा के लड्डू' और चिवड़ा नमकीन था। इसके अलावा उन्हें झींगा मछली, ठंडाई, खीर और मालपुआ अधिक पसंद था। उनके खाने-पीने से जुड़े किस्से भी बेहद दिलचस्प रहे हैं। जानते हैं ऐसे ही 4 किस्से...

1- शरारती थे वाजपेयी, दोस्तों को देने पड़ते थे इमरती के पैसे
अटल बिहारी के पड़ोसी और बचपन के मित्र मनराखन मिश्र ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अटलजी बचपन में काफी शरारत भी करते थे। पैसे की तंगी के बावजूद वो और अटलजी दोस्तों के साथ मिलकर शहर के प्रसिद्ध खान-पान की जगहों पर जाते थे। कई बार तो अटलजी उन्हें इमरती खिलाने ले जाते थे। एक आने और दो आने की इमरती खाकर खुद वहां से चले जाते और जब दोस्त उन्हें अपने हिस्से के पैसे देने की बात कहते तो वे दुकान से दूर खड़े हो जाते थे। इसलिए दोस्तों को ही पैसे देने पड़ते थे।

2- जब रात में 2 बजे नमकीन लेने पहुंच गए थे अटल 
ग्वालियर के फालका बाजार स्थित नमकीन व्यवसायी सुन्नूलाल गुप्ता 'बेडर' की दुकान के भी अटलजी ग्राहक रह चुके हैं। वे यहां स्पेशल चिवड़ा खाने आते थे। सुन्नूलाल बताते हैं कि एक बार अटलजी विदेश मंत्री रहते हुए चुनावी सभा के सिलसिले में ग्वालियर आए थे। उनके आने की सूचना मुझे पहले मिल चुकी थी। उनके लिए चिवड़ा (नमकीन) तैयार करना था। चूंकि अटलजी की सारी सभाएं देर से चल रही थीं, इसलिए मैंने सोचा कि शायद आज वह ग्वालियर नहीं आएंगे और मैं दुकान बंद करके छत पर सो गया। इसी बीच, रात के 2 बजे पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाती हुईं मेरी दुकान के आगे आकर रुक गई। जब मैं नीचे उतरा तो उन्हीं गाड़ियों के बीच एक कार में से केंद्रीय मंत्री अटलजी उतरे और बोले- मैं हूं अटल बिहारी, चिवड़ा तैयार है ? अटलजी को देखकर मेरे शरीर में स्फूर्ति आ गई और मैं झट से तैयार होकर दुकान के नीचे पहुंच गया। तत्काल स्पेशल मेवों का चिवड़ा तैयार कर उन्हें दे दिया। उन्होंने मुझे मूल्य से ज्यादा पैसे दिए। ऐसा कभी नहीं हुआ कि अटल जी ने ज्यादा पैसे नहीं दिए हों।

3- दिल्ली में भी कम नहीं हुआ लगाव, मंगाते थे मथुरा के पकौड़े
अटलजी जब भी मथुरा आते तो वहां चौक बाजार के मूंग की दाल के पकौड़े जरूर खाते। अटलजी के साथी और नगर पालिका परिषद् के पूर्व चेयरमेन बांके बिहारी माहेश्वरी के अनुसार, मथुरा के चौक बाजार में स्थित सुरेश पकौड़े वाले की दुकान पर अटल जी मूंग की दाल के बनने वाले पकौड़ों का स्वाद जरूर चखते। करीब 40 साल पुरानी इस दुकान पर आज भी पकौड़ों के शौकीन लोगों की भीड़ लगी रहती है। मथुरा से जब कोई दिल्ली उनसे मिलने जाता तो पकौड़े लेकर जाता था। यहां के पकौड़ों से उनका लगाव तब बढ़ा जब उन्होंने मथुरा से लोकसभा का चुनाव लड़ा। 

4- झींगा मछली के शौकीन अटलजी ने बाबूलाल गौर से मंगाई थी भांग
उन्हें ठंडई और मांसाहार में झींगा मछली बेहद पसंद है। उनकी स्पेशल भांग उज्जैन से आती थी। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर कहते हैं कि जब वो नेता प्रतिपक्ष थे तो एक बार वह इंदौर से उज्जैन कार से आए। उसके बाद वह उन्हें लेकर गोपाल मंदिर गए। अटल जी ने कहा कि मंदिर तांगे से चलेंगे कार से नहीं। फिर अटल जी ने कहा कि तीन गिलास भांग का घोंटा ले आओ। उन्होंने कहा कि दो गिलास मैं पीऊंगा और एक गिलास तुम पीना। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरे गिलास में बादाम किशमिश भी डाल देना। बाबूलाल गौर ने कहा कि वह ऐसे इंसान हैं कि उनसे कैसा भी मजाक कर लो बुरा नहीं मानते हैं। अटल जी बहुत खुले दिल के आदमी हैं।

 

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