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पानी टैंकरों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग पर 72 लाख खर्च, सर्वर डाउन होते ही 5 लाख उपभोक्ता प्यासे

जलदाय विभाग: टैंकरों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग पर 72 लाख खर्च, सर्वर डाउन होते ही 5 लाख उपभोक्ता प्यासे

Shyam Raj | Sep 12, 2018, 03:55 PM IST

जयपुर।    जलदाय विभाग ने पेयजल सप्लाई में लगे टैंकरों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग करने व फर्जीवाड़ा रोकने के लिए विभाग के नॉर्थ सर्किल में द कनसोल कंपनी को 72 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर दिया है। हालांकि इससे एक परेशानी भी खड़ी हो गई है। वह यह कि सर्वर डाउन होने व इंटरनेट की दिक्कत होते ही पेयजल परिवहन बाधित हो जाता है और लोगों को प्राइवेट टैंकर खरीदने पड़ते हैं।

 

कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग के इंजीनियर्स ने द कनसोल कंपनी को फायदा देने के लिए केवल उसके सॉफ्टवेयर के बदले ही 72 लाख रुपए का पेमेंट कर दिया। अब उपभोक्ताओं को इसकी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। ऐसे में यह राशि विभाग के इंजीनियर्स से वसूली जाए और पुराना सिस्टम ही दुबारा लागू किया जाएगा। नया सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद अकेले नॉर्थ सर्किल में 700 से ज्यादा टैंकर ट्रिप कम हो गए। पिछले दो दिन से तो लोगों तक आधे टैंकर भी नहीं पहुंच रहे हैं।

 

जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता (नॉर्थ) आरसी मिश्रा का कहना है कि सर्वर डाउन होने व इंटरनेट बाधित होने के कारण टैंकर सप्लाई नहीं हो पाते हैं। हालांकि टैंकर ट्रिप मानसून आने व मौसम अच्छा होने के कारण हुए हैं।

 

यह है मामला

शहर में सरकारी टैंकरों से पानी बेचने व फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जलदाय विभाग अब ऑनलाइन सॉफ्टवेयर और मोबाइल-वेब एप्लीकेशन से मॉनिटरिंग कर रहा है। अब हाईड्रेंट से पानी भरने व टंकी में खाली करने के समय टैंकर पर लगे लेवल इंडिकेटर का फोटो लेकर सॉफ्टवेयर में अपलोड करते हैं।

 

इसके साथ ही उपभोक्ता या स्थानीय व्यक्ति के मोबाइल पर गए ओटीपी बताने के बाद ही टैंकर वेरिफाई होता है। विभाग पेमेंट करेगा। नए “रियल टाइम वाटर टैंकर ट्रेकिंग मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम” पर डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्चा कर रहा है। फिलहाल यह सिस्टम विभाग के नॉर्थ सर्किल के चार डिविजन में शुरु किया है। नॉर्थ सर्किल में द कनसोल कंपनी को 72 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर दिया है।
 

ऐसे काम करता है सिस्टम
जलदाय विभाग के सभी सरकारी टैंकरों पर पीछे की तरफ लेवल इंडिकेटर लगाया जाएगा। पहले टैंकर जीपीएस से मॉनिटरिंग होती थी, लेकिन अब मोबाइल एप बेस जीपीएस सिस्टम होगा। ड्राइवर के स्मार्ट मोबाइल में यह एप होगा। ड्राइवर को हाईड्रेंट पर पानी भरते ही लेवल व टैंकर की फोटो सॉफ्टवेयर व एप में अपलोड करना होगा। टैंकर कॉलोनी या क्षेत्र की टंकी में पानी डालने से पहले व बाद में भी लेवल इंडिकेटर व टैंकर की फोटो अपलोड करेगा ताकि रास्ते में पानी बेचने का मालूम चल जाए। हाइड्रेट व टंकी की लोकेशन सॉफ्टवेयर पर डाल दी है तथा यहां गूगल से कनेक्ट है।

 

अब कूपन के बजाए ओटीपी से वेरिफाई 
 

अब तक हाइड्रेंट पर मौजूद कर्मचारी टैंकर ड्राइवर को कूपन देते थे। कूपन पर उपभोक्ता के हस्ताक्षर से वेरिफाई माना जाता था। लेकिन अब टैंकर भरने की फोटो अपलोड होते ही ओटीपी जनरेट हो जाता है। यह ओटीपी उपभोक्ता व जेईएन के पास जाता है। टैंकर का पानी टंकी में खाली होने के बाद ड्राइवर संबंधित व्यक्ति से ओटीपी लेकर सिस्टम में डालता है। इसके बाद ही टैंकर वेरिफाई होगा तथा पेमेंट होगा।



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