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कुड़ी मार रैकेट/ बाघा अस्पताल के मालिक डॉ. कंग पर केस, हेल्थ सेक्रेटरी ने मांगी रिपोर्ट



Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 12:23 AM IST

जालंधर.  भोगपुर के बाघा अस्पताल में किए जा रहे लिंग निर्धारण टेस्ट और अबॉर्शन मामले में अंबाला पुलिस ने मालिक गायनेकॉलोजिस्ट डॉ. एचएस कंग पर केस दर्ज कर लिया है। इधर, पंजाब में प्रिंसिपल हेल्थ सेक्रेटरी सतीश चंद्रा ने डीसी वीके शर्मा से रिपोर्ट तलब की है।

 

मंगलवार को अंबाला से आई हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने डॉ. कंग को लिंग निर्धारण टेस्ट करते पकड़ा था। स्टाफ ने माना है कि - मंगलवार सुबह भी अस्पताल में 32 साल की महिला का अबॉर्शन हुआ था। सिविल सर्जन दफ्तर जालंधर की ढील के कारण डॉ. कंग दोपहर करीब दो बजे अस्पताल को ताला लगाकर चले गए थे।

 

भास्कर ने जब डॉ. एचएस कंग के अस्पतालों का दौरा किया तो पाया कि वहां बाकायदा बोर्ड लगा रखे थे, जिन पर लिखा रखा था कि यहां अबॉर्शन किए जाते हैं। अंबाला के बलदेव नगर थाने के एसएचओ रजनीश कुमार यादव ने बताया कि - हमने महिला दलाल हरजीत कौर, बीएएमएस डॉ. नरोत्तम पुरी और बाघा अस्पताल के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

 

बुधवार को आरोपी हरप्रीत कौर को अदालत में पेश करने के बाद एक दिन का रिमांड मिल गया है। पुलिस ने द प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स  एक्ट (पीएनडीटी ) की धारा 18, 23, 3 (3), 4, 5(2), 6 (ए) और आईपीसी की धारा 120 बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है। 

 

एफआईआर में लिखा है कि सेहत विभाग की टीम को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि अंबाला की एक महिला लिंग जांच के लिए पंजाब में गर्भवती महिलाओं को ले जा रही है। हमने मुखबिर की मदद से महिला दलाल हरजीत कौर से संपर्क साधा। हरजीत कौर ने कहा 30 हजार रुपए लगेंगे। हमने 10 सितंबर को ही कैनरा बैंक की ब्रांच में पीएनडीटी खाते से खाते से 30 हजार रुपए निकाल लिए थे।

 

जालंधर जाने के लिए सरकारी पैसे से गाड़ी भी बुक करवा ली और एजेंट हरजीत कौर को कालका चौक पर मिलने को कहा। 11 सितंबर की सुबह हम 6:30 बजे सिविल सर्जन दफ्तर पर इकट्ठा हुए और सात बजे जालंधर के लिए रवाना हुए।

 

कैमरे न लगाने पर डॉ. कंग की दलील, किसी ने बताया  ही नहीं. भास्कर टीम बुधवार जब बाघा अस्पताल भोगपुर पहुंची तो अंदर अंग्रेजी और पंजाब में दो बोर्ड पड़े मिले। इन पर सबसे पहले अल्ट्रासाउंड और दूसरे नंबर पर अबॉर्शन की सेवाओं के बारे में लिख रखा था। पीएनडीटी एक्ट के तहत हर स्कैनिंग सेंटर में सीसीटीवी कैमरा लगाने जरूरी होते हैं। डॉ. कंग के दोनों स्कैनिंग सेंटर्स में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। डॉ. कंग ने बताया कि - सेहत विभाग वाले रुटीन में जांच करने आते थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं बताया।

 

कई बार विवादों में फंसे
- 2004 में पहली बार सिविल सर्जन दफ्तर जालंधर की टीम ने बाघा अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन सील की थी।
- 2004 में चंडीगढ़ से पीएनडीटी की टीम ने अस्पताल में रेड की थी। 
- 2007 में सिविल सर्जन डॉ. जेपी सिंह के कार्यकाल में डॉ. कंग को पठानकोट चौक स्थित बाघा अस्पताल से लिंग जांच करते पकड़ा। 14 जून को पीएनडीटी 5, 6, 23, 25, 29,30 केस दर्ज हुआ और निचली अदालत से 2 साल की सजा हुई। सेशन कोर्ट से बरी हो गए।
- 2007 वाला केस चल ही रहा था। स्कैनिंग सेंटर सील था। उन्होंने डॉ. एसपी सिंह के नाम से अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदी और भोगपुर में बाघा अस्पताल खोला।
- 2011 में सिविल सर्जन डॉ. एसके गुप्ता के कार्यकाल में सेंटर पर छापा मारा गय थाा।  
- 2015-16 में   डॉ. कंग समराला रोड लुधियाना शिफ्ट हो गए और स्कैनिंग सेंटर शुरू कर दिया।
- 17-06-2016 को भोगपुर और पठानकोट चौक स्थित अस्पतालों में स्कैनिंग शुरू कर दी। अब वह दोपहर 3:00 बजे तक भोगपुर और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक पठानकोट चौक स्थित अस्पताल में स्कैनिंग करते हैं।

 

जालंधर में अब तक तीन डॉक्टरों पर आरोप साबित हो चुके 
शहर में पिछले 15 सालों में सिर्फ 20 अस्पताल या डॉक्टरों के खिलाफ ही केस दर्ज हुए हैं। इनमें से सिर्फ तीन पर आरोप साबित हो पाए। इन्हें नीचली अदालत में सजा हुई लेकिन ऊपरी अदालत ने बरी कर दिया। 
- 2002 गुरु तेग बहादुर अस्पताल शाहकोट के डॉ. संतोख सिंह    3 साल सजा
-2003 कठार के औलख अस्पताल के जगदीश सिंह औलख    दो साल सजा
-2007 पठानकोट चौक स्थित बाघा अस्पताल के डॉ. एचएस कंग    दो साल सजा

सिविल सर्जन दफ्तर ने रिसेप्शनिस्ट को नोटिस थमाया
बुधवार दोपहर बाद पीएनडीटी जिला कोऑर्डिनेटर दीपक बोपारिया ने बताया कि भोगपुर में जब वह बाघा अस्पताल गए तो डॉ. कंग नहीं मिले। उनसे फोन पर बात हुई और कारण बताओ नोटिस रिसेप्शनिस्ट को थमा दिया है।

 

गायनेकॉलोजिस्ट नहीं लगाते अबॉर्शन के बोर्ड

आमतौर पर गायनेकॉलोजिस्ट अस्पतालों में अबॉर्शन के बोर्ड नहीं लगाते। अबॉर्शन के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी या सर्जिकल अबॉर्शन शब्दों का  इस्तेमाल चलन में है। अगर गर्भ 9 हफ्ते से कम उम्र का हो आपात स्थिति में सर्जिकल  अबॉर्शन  किया जाता है। ज्यादातर डॉक्टर अबॉर्शन शब्द को कहीं लिखने या बोलने से परहेज करते हैं।

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