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नक्सली इलाके में तैनात सीआरपीएफ के हवलदार ने खुद को गोली मारकर दी जान

dainikbhaskar.com | Sep 09, 2018, 12:50 PM IST

महेंद्रगढ़ हरियाणा का रहने वाला था जवान, पारिवारिक विवाद में खुदकुशी की आशंका

डमी फोटो
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

- दो दिन पहले ही छुट्टी के बाद घर से लौटा था जवान, खुद की राइफल से मारी गोली

गरियाबंद.छत्तीसगढ़ केनक्सलप्रभावित क्षेत्र सीआरपीएफ के जवान करण सिंह (47) ने शनिवार देर रात अपनी सर्विस राइफल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। महेंद्रगढ़ हरियाणा निवासी करण हवलदार पद पर तैनात था। आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है, लेकिन माना जा रहा है कि पारिवारिक विवाद के चलते उसने यह कदम उठाया है।

तीन साल से था तैनात

जानकारी के मुताबिक करण सिंह सीआरपीएफ की 65वी बटालियन में हवलदार के पद पर बिंद्रानवागढ़ कैंप में तीन साल से तैनात था। करण ने शनिवार देर रात राइफल से खुद को सिर में गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर पहुंचे साथी जवानों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जवान दो दिन पहले ही अपने घर से छुट्टी से ड्यूटी पर लौटा हुआ था। बताया जा रहा है कि बीते दिनों सेपारिवारिकविवाद के चलते परेशान चल रहा था। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है । साथ ही परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है।

एक साल में 36 जवानों ने की आत्महत्या

छत्तीसगढ़ केनक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात जवानों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। देश की रक्षा में अपनी जान की बाजी लगाने वालेजांबाजसैनिक खुद की परेशानियों से हार रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो अकेले वर्ष 2017 में ही 36 जवान आत्महत्या की थी। राज्य के पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 से अक्टूबर 2017 तक सुरक्षा बलों के 115 जवानों ने आत्महत्या की। इनमें राज्य पुलिस के 76 तथा अर्धसैनिक बलों के 39 जवान शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से 58 सुरक्षा कर्मियों ने, बीमारी के कारण 12 सुरक्षा कर्मियों ने, काम से संबंधित (अवकाश नहीं मिलने) जैसे कारणों से 9 और अन्य कारणों से 15 सुरक्षा कर्मियों ने आत्महत्या की है। वहीं, 21 सुरक्षा कर्मियों के आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। राज्य में वर्ष 2009 में 13 जवानों ने, 2016 में 12 जवानों ने तथा वर्ष 2011 में 11 जवानों ने आत्महत्या की है।