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युग हत्याकांड: जान-पहचान वालों ने 3 महीने टॉर्चर कर जिंदा फेंका था पानी में, 2 साल बाद कंकाल मिला तो अब कोर्ट में तीनों दोषियों को फांसी की सजा

जून 2014 के मामले में शिमला की डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट का बड़ा फैसला, 7 अगस्त को दिया था तीनों को दोषी करार।

dainikbhaskar.com | Sep 05, 2018, 04:32 PM IST

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला में बुधवार को कोर्ट से एक बड़ा फैसला आया। यहां डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट ने महज चार साल के मासूम युग की हत्या के मामले में तीनों दोषियाें को मौत की सजा सुनाई है। दोषियों ने उसे 3 महीने तक टॉर्चर करने के बाद पत्थर बांधकर जिंदा ही पानी के टैंक में फेंक दिया था। फिर 2 साल बाद उसका कंकाल मिला था।

 

कोर्ट ने बीती 7 अगस्त को इन सभी को दोषी करार दे सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि इससे पहले भी कोर्ट तीन केसों में फांसी की सजा सुना चुका है, लेकिन इन्हें हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

 

मामले के अनुसार चार जून 2014 को शिमला के संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखने वाले तीन युवकों ने चार साल के मासूम बालक युग का अपहरण किया और फिर बर्बरता से उसकी हत्या कर दी। दोषियों तेजेंद्र सिंह, चंद्र शर्मा और विक्रांत बक्शी ने युग को शहर में ही एक पेयजल टैंक में डाल दिया था। युग शिमला के राम बाजार के एक कारोबारी का बेटा था और तीनों अपराधी युग के परिजनों के जान-पहचान वाले थे। दोषियों ने युग के परिजनों से फिरौती की मांग की थी। पकड़े जाने के डर से उन्होंने युग की हत्या कर दी थी। अगस्त 2016 में सीआईडी ने युग हत्याकांड को सुलझाते हुए तीनों दोषियों को गिरफ्तार किया था।

 

 

3 महीने टॉर्चर के बाद जिंदा टैंक में फेंका, 2 साल बाद मिला कंकाल
युग के हत्यारों ने उसे तीन महीने तक टॉर्चर किया। घर में युग को एक बेड बॉक्स के भीतर बंद रखा गया। कई दिन तक खाना नहीं दिया। जबरदस्ती शराब पिलाई और बेरहमी से पिटाई की। बाद में जब मांगी गई साढ़े 3 करोड़ की फिरौती नहीं मिली तो युग को पत्थर से बांध कर भराड़ी में पानी के टैंक के भीतर जिंदा ही फेंक दिया। दो साल बाद 22 अगस्त 2016 को युग का कंकाल मिला।

 

 

2300 पन्नों की चार्जशीट, 130 गवाह
इस हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। सीआईडी ने आरोपियों के खिलाफ 2300 पन्नों की चार्जशीट तैयार की थी। इसके बाद एक साल मुकद्दमा चला और फिर 7 महीने तक ट्रायल चला। इस केस में 130 गवाहों में से 105 लोगों की गवाही अदालत में हुई, जिसमें 6 फोरेंसिक एक्सपर्ट और 3 डॉक्टर भी शामिल हैं। डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र सिंह की कोर्ट ने 7 अगस्त 2017 को तीनों को दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया। 13 अगस्त को सजा पर बहस हुई और आखिर बुधवार को कोर्ट ने हत्या के तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। फैसले पर गौर करें तो तीनों दोषियों को एक महीने के भीतर हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार होगा।

 

 

हिमाचल में इस तरह का यह चौथा फैसला

एक जानकारी के मुताबिक हिमाचल में फांसी की सजा सुनाए जाने का यह चौथा मामला है। इससे पहले तीन केस में कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

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