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लाइसेंस लिए बिना ऑनलाइन दवाएं नहीं बेच सकेंगी ई-फार्मेसी कंपनियां

केमिस्ट शॉप जैसी कार्रवाई का प्रस्ताव, 3,000 करोड़ का है सालाना कारोबार, अब तय होंगे नियम-कानून

पवन कुमार | Sep 02, 2018, 02:34 AM IST

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी, 45 दिन में स्टेकहोल्डर्स से मांगी राय

नई दिल्ली.  जल्द ही देश में ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियां रजिस्ट्रेशन कराए बिना कारोबार नहीं कर सकेंगी। जो भी ई-फार्मेसी कंपनियां ऑनलाइन दवाएं बेचेंगी  उनके नाम सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएंगे।

यही नहीं, सीडीएससीओ की ओर से एक लोगो भी जारी किया जाएगा जो इन कंपनियों के पोर्टल पर होगा। इससे असली-नकली की पहचान हो सकेगी। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. एस. ईश्वरा रेड्डी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, ‘देशभर में ई-फार्मेसी सालाना 3000 करोड़ रुपए का है। यह 100% सालाना की दर से बढ़ रहा है। इसलिए इसको रेगुलेट करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया गया है और 45 दिन के भीतर सभी स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी गई है।’  डॉ. रेड्‌डी ने कहा, ‘ई-फार्मेसी कारोबार में खर्च कम है इसलिए उपभोक्ताओं को केमिस्ट शॉप की तुलना में 15 से 20% सस्ती दवाएं मिलेंगी। ऑनलाइन बिजनेस और डिजिटल पेमेंट होने से इस व्यवसाय में पारदर्शिता आएगी। सही-सही पता चल पाएगा कि कितनी कंपनियां इस व्यवसाय में लगी है और कितनी दवा की बिक्री ई-फार्मेसी के माध्यम से हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक देश में 200 से 300 छोटी और 10 से 15 बड़ी कंपनियां हैं जो ई-फार्मेसी के कारोबार में लगी हैं।’

 

अभी ऑनलाइन दवा खरीदने वालों को क्वालिटी का पता नहीं होता : अभी देश में लाखों लोग ऑनलाइन दवाएं खरीदकर खा रहे हैं। लेकिन उन्हें क्वालिटी के बारे में पता नहीं होता है। न ही दवा बेचने वाली कंपनियों की कोई जिम्मेदारी होती है। नकली और घटिया दवा मिलने के बाद भी ग्राहक न तो कहीं शिकायत कर पाते हैं, न ही उस कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई हो सकती है। इसकी वजह देश में ई-फार्मेसी को रेगुलेट करने के लिए नियम-कानून का न होना है। 

लाइसेंस और कार्रवाई का प्रस्ताव 

- ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों को केंद्र/राज्य स्तर पर ड्रग्स डिपार्टमेंट में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 
- लाइसेंस लेने के लिए 50,000 रुपए शुल्क देना होगा। लाइसेंस हर तीन साल में रिन्यू कराना होगा। 
- केंद्र/राज्य सरकार के अधिकारी इन कंपनियों के स्टोर की जांच और छापेमारी कर सकेंगे।
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई का भी विकल्प होगा।

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