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13 सितंबर गणेश चतुर्थी पर मिट्टी के ही गणेश जी क्यों पूजें, पुराणों में बताई है इसकी वजह

dainikbhaskar.com | Sep 11, 2018, 02:54 PM IST

Eco Friendly Mitti ke Ganesh: मिट्टी में स्वाभाविक पवित्रता होती है। ऐस गणेश जी की पूजा से नकारात्मकता दूर होती है।

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13 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर मिट्टी के गणेश ही स्थापित करें। मिट्टी की गणेश प्रतिमा के पूजन से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। मिट्टी में स्वाभाविक पवित्रता होती है। मिट्टी की यानी पार्थिव गणेश प्रतिमा प्रकृति के 5 मुख्य तत्व यानी भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश बनी होती है। इसलिए इसमें भगवान का आवाह्न और उनकी प्रतिष्ठा करने से कार्यसिद्धि होती है। वहीं प्लास्टर ऑफ पेरिस और अन्य केमिकल्स से बनी गणेश प्रतिमा में भगवान का अंश नहीं आ पाता और इनसे नदियां अपवित्र होती हैं। ब्रह्मपुराण और महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार नदियों को प्रदूषित करने से दोष लगता है।

मिट्टी के ही गणेश जी क्यों -

पुराणों में भगवान श्रीगणेश के जन्म की कथा में बताया गया है कि माता पार्वती ने पुत्र की कामना से मिट्टी का ही पुतला बनाया था, फिर शिवजी ने उसमें प्राण संचार किए। वो ही भगवान गणेश थे।शिव महापुराण में धातु की अपेक्षा पार्थिव प्रतिमा को महत्व दिया है। शास्त्रों में सोना, चांदी और तांबे से बनी मूर्तियों की पूजा का विधान बताया गया है। इनके साथ ही पार्थिव प्रतिमाओं को भी बहुत पवित्र माना गया है। इसके अलावा कुछ विशेष काष्ठ यानि खास लकड़ियों से बनी मूर्तियां भी पवित्र मानी गई हैं लेकिन इन सब में पार्थिव प्रतिमा की पूजा का महत्व ज्यादा है। श्रद्धालु अपने सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी आदि धातु या मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाकर पूजा करें।

मिट्टी के गणेशजी से प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी जी-

मिट्टी के गणेश की प्रतिमा के दर्शन व पूजा अर्चना करने मात्र से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है। शास्त्रों में भी उल्लेख है कि मिट्टी या फिर मिट्टी व गोबर के मिश्रण से बनी गणेश प्रतिमाओं की पूजा अर्चना करने से हमारी व घर की नकारात्मक ऊर्जा तो नष्ट होती है। साथ में अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में बुध ग्रह अशुभ होता है तो ग्रह भी शांत होता है।