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Ganesh Chaturthi 2018 Special: गणेश जी की शारीरिक संरचना में छिपे हैं ये पांच संदेश, जानिए क्या हैं ये

आपने देखा होगा कि गणेशजी का मस्तक यानी सिर बड़ा है। बड़े सिर वाले तेज बुद्धि और नेतृत्व गुण से योग्य होते हैं।

DainikBhaskar.com | Sep 12, 2018, 10:47 AM IST

नई दिल्ली. Ganesh Chaturthi 2018 Special: इंतजार की घड़ियां समाप्त होने को है। आपको पता ही है कि 13 सितंबर को विनायक की स्थापना होनी है। छोटे हों या बड़े, अमीर हों या गरीब, अब हर कोई विघ्नहर्ता के आगमन का इंतजार कर रहा है। गजानन भगवान शिव और पार्वती के पुत्र हैं। आपने उनके वाहन मूषक को हमेशा उनके आसपास ही देखा होगा। गणेश के कई नाम हैं। उन्हें गणों का स्वामी माना जाता है इसलिए वो गणपति हैं। गज यानी हाथी जैसा सिर होने के कारण वो गजानन भी हैं। सनातन परंपरा में किसी भी शुभकार्य के पहले भगवान गणेश का आह्वान और पूजन किया जाता है। इसलिए उन्हें आदिपूज्य भी कहा जाता है। प्रथम पधारो गणेश का आह्वान हमारी परंपरा का हिस्सा है। Ganesh Chaturthi के इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि भगवान गणेश की शारीरिक संरचना का आखिर क्या महत्व है और इनसे क्या संदेश मिलता है। 

 

1) बड़ा मस्तक लेकिन छोटी आंखें
- आपने देखा होगा कि गणेशजी का मस्तक यानी सिर बड़ा है। बड़े सिर वाले तेज बुद्धि और नेतृत्व गुण से योग्य होते हैं। इसके अलावा इससे यह संदेश भी मिलता है कि सोच का दायरा व्यापक यानी बड़ा होना चाहिए। वहीं, पार्वती पुत्र की आंखें छोटी हैं। इस तरह के लोगों को गंभीर लेकिन चिंतनशील प्रवृति का माना जाता है। यानी चीजों को सूक्ष्मता से विश्लेषित कर निर्णय प्रक्रिया संपन्न करनी चाहिए। इससे फैसले गलत नहीं होते।  

 

2) सूप जैसे लंबे कान
- चेहरे का एक हिस्सा कान या कर्ण हैं। आपने घर में अन्न फटकने वाला सूपा या सूप देखा होगा। गणेश जी के कान इसी आकार के हैं। सूप जैसे कानों की वजह से गणेश को सूपकर्ण या गजकर्ण (हाथी जैसे कान) कहा जाता है। इस तरह के व्यक्ति भाग्यशाली और लंबे जीवन वाले होते हैं। ये भी कहा जाता है कि ऐसे लोग सबकी बात सुनते हैं लेकिन निर्णय के पहले अपनी मेधा यानी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करते हैं। इसका एक संदेश यह भी है कि सूप जैसे कचरे को साफ करके अलग कर देता है वैसे ही गजकर्ण भी गलत बातों को अंदर नहीं आने देते।  

 

3) हाथी जैसी सूंड
- यह हर पल हिलती है। यानी सक्रियता का संदेश और संकेत देती है। कहा जाता है कि निष्क्रिय रहना अच्छा नहीं होता। सक्रिय व्यक्ति हमेशा प्रसन्न और स्वस्थ रहता है। गणेश जी की सूंड से जुड़ी एक मान्यता और भी है। कहा जाता है कि सुख-समृद्धि की कामना रखने वालों को दायीं और शत्रु को परास्त करने की कामना रखने वालों को बायीं ओर मुड़ी सूंड के गणेश की अर्चना करनी चाहिए।  

 

4) बड़ा पेट
- बड़े पेट के कारण गजानन को एक नाम लंबोदर भी मिला। यह कहा जाता है कि वो इसी वजह से अच्छी और बुरी बातों में फर्क कर उन्हें भी पचा लेते हैं। इसके बात निर्णय क्षमता का प्रयोग करते हैं। इसे खुशहाली का प्रतीक भी माना जाता है।  

 

5) एकदंत यानी एक दांत वाले
- मान्यताओं के अनुसार, बाल्यकाल में भगवान गणेश का ब्रह्मऋषि परशुराम से युद्ध हुआ। परशुराम क्रोधी स्वभाव के थे। युद्ध में गणेश का एक दांत कट गया। इसके बाद से ही उन्हें एकदंत कहा गया। इस टूटे हुए दांत का इस्तेमाल गणेश जी ने लेखन में किया। यह उनकी कुशाग्र बुद्धि का प्रतीक है। यह संदेश भी मिलता है कि हम आम जीवन में भी चीजों का सदुपयोग किस तरह कर सकते हैं।

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