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महंगे थे पतंजलि के प्रोडक्ट, सरकार ने डिपुओं के लिए कर दिए रिजेक्ट

महंगे होने की वजह से हिमाचल प्रदेश सरकार ने पलटा फैसला

Bhaskar News | Sep 07, 2018, 07:02 AM IST

शिमला. योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी के साथ करार को लेकर राज्य सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। 7 महीनों की कसरत के बाद राज्य सरकार अब रामदेव की कंपनी पतंजलि के साथ करार करने को इच्छुक नहीं है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि कंपनी के उत्पाद काफी महंगे हैं। इसको लेकर खाद्य आपूर्ति निगम ने फील्ड सर्वे भी करवाया है। फरवरी महीने में राज्य सरकार ने पतंजलि के उत्पादों को सरकारी डिपुओं में बेचने का निर्णय लिया था। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री किशन कपूर की इसको लेकर पतंजलि के अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई थी। इसके बाद यह मामला कैबिनेट तक पहुंचा था। निगम ने अपनी इस योजना के बारे में कैबिनेट को अवगत करवाया था। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री किशन कपूर ने कहा कि पतंजलि के उत्पाद काफी महंगे है। जिसके चलते इसे खरीदने पर फैसला नहीं लिया जा रहा है।


पहले पतंजलि के प्रोडक्ट बेचने का खाद्य आपूर्ति निगम ने लिया था फैसला
इन उत्पादों को बेचने की थी तैयारी |सरकारी राशन के डिपुओं में सस्ते राशन के साथ रामदेव के पतंजलि ब्रांड के उत्पाद साबुन, तेल, मसाले, शैंपू, शहद, पेय उत्पाद, शर्बत, होम-केयर, जूस, करियाने का सामान, दालें, सिरप के अलावा अन्य तरह के उत्पादों को बेचने की योजना बनाई थी। सरकार ने तर्क दिया था कि लोग इन उत्पादों को ज्यादा खरीदते हैं इसलिए घर द्वार पर आसानी से इन्हें मुहैया करवाया जाएगा। प्रदेश में 4700 से अधिक सरकारी डिपो हैं, जहां से लोगों को सस्ता राशन मिलता है।
गोदामों में पहुंची खराब चीनी, भेजी वापस
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री किशन कपूर ने कहा कि वीरवार को उचित मूल्य पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जाने वाले खाद्यान्नों की आपूर्ति की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल की निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं और जल्द ही उपभोक्ताओं को इसकी आपूर्ति की जाएगी। चीनी का कोटा भी उपभोक्ताओं को जल्द प्रदान किया जाएगा, इसकी आपूर्ति की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा की चीनी की खराब आपूर्ति पर तुरंत कार्रवाई करते हुए इसे वापस किया गया। उन्होंने कुछ डिपुओं पर मशीन खराबी की शिकायतों को गंभीरतापूर्वक लेते हुए निर्देश दिए कि मशीन की खराबी राशन वितरण में कोई बहाना नहीं होना चाहिए और ऐसे कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि दालों की आपूर्ति को लेकर भारत सरकार के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत हुई है और दालें हैफेड से खरीदने पर सहमति बनी है, जिससे दालों पर सालाना करोड़ों रुपये की बचत होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिये विभागीय सचिव, निदेशक तथा नागरिक आपूर्ति के प्रतिनिधि की एक समिति गठित की गई है, जो दालों की आपूर्ति की विभिन्न पहलुओं सहित गुणवत्ता की जांच भी सुनिश्चित करेगी।
33,300 को दिए फ्री गैस कनेक्शन|किशन कपूर ने बताया कि मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना के तहत राज्य के 33,300 पात्र परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। सितंबर अंत तक 10,000 से अधिक परिवारों को ये कनेक्शन उपलब्ध करवा दिए जाएंगे। इसके लिए 1.50 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनकी जांच की जा रही है। 1 जनवरी, 2018 के बाद 2960 परिवारों का विभाजन हुआ है जिन्होंने कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। जांच के बाद 51,863 परिवार कनेक्शन के लिए पात्र पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश इस योजना के लक्ष्यों को हासिल कर देश का पहला राज्य बन सके। प्रधान सचिव खाद्य व नागरिक आपूर्ति ओंकार शर्मा, निदेशक मदन चौहान सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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