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मौत के बाद पेमेंट विवाद पर डेड बॉडी नहीं रोक सकते, इमर्जेंसी में सभी अस्पतालों को करना होगा मुफ्त इलाज

प्रारूप के तहत हर सरकारी, गैर सरकारी अस्पताल को मरीजों की समस्या सुनने के लिए एक आंतरिक सिस्टम बनाना होगा

Dainikbhaskar.com | Sep 04, 2018, 11:00 AM IST

नई दिल्ली/जमशेदपुर.  इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद पेमेंट विवाद को लेकर डेड बॉडी नहीं सौंपने को अब अपराध माना जाएगा। देश में पहली बार मरीजों के अधिकारों का प्रारूप तैयार किया गया है। 30 दिनों में आम लोग भी इस पर अपनी राय दे सकते हैं। फिर अंतिम रूप देकर राज्यों को लागू करने के लिए भेजा जाएगा। इसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तैयार किया है।

 

हर सरकारी, गैर सरकारी अस्पताल में दर्ज होगी मरीज की समस्या
प्रारूप के तहत हर सरकारी, गैर सरकारी अस्पताल को मरीजों की समस्या सुनने के लिए एक आंतरिक सिस्टम बनाना होगा। शिकायत के 24 घंटे के अंदर शिकायतकर्ता को शिकायत की स्थिति के बारे में बताना होगा। 15 दिनों के अंदर शिकायत पर की गई कार्रवाई का लिखित जवाब देना होगा। यदि मरीज संतुष्ट नहीं हुआ तब मरीज के पास स्टेट काउंसिल में अपील करने का विकल्प होगा। काउंसिल को तीन या पांच सदस्यीय कमेटी बनाने का अधिकार होगा। कमेटी को दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है। कमेटी से भी मरीज को संतुष्टि नहीं मिलती है, तो स्टेट मेडिकल काउंसिल व कंज्यूमर फोरम का विकल्प होगा। प्रारूप के लिए अपनी राय help.ceact2010@nic.in पर सितंबर के अंत तक भेज सकते हैं। 


प्रारूप में मरीजों को दिए राइट्स 

 मरीज को दूसरे डॉक्टर से ओपीनियन लेने पर तुरंत केस हिस्ट्री देनी होगी।   डिस्चार्ज होने के 72 घंटे में पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी।   रिपोर्ट के लिए डॉक्टर को फोटो कॉपी समेत अन्य खर्च देना होगा।   अटेंडेंट जिस भाषा का जानकार होगा, उसी भाषा में समझाना होगा।   इलाज का खर्च ज्यादा होगा तो उसका कारण भी बताना होगा।   मरीज किसी भी लैब से जांच और फार्मेसी से दवा खरीद सकेगा।   दवा और इंप्लांट की कीमत एनपीपीए के दर पर ही दी जाएगी।

 
जमशेदपुर के अस्पतालों में हर माह ऐसे दो-तीन मामले आते हैं 
27 मई : आदित्यपुर निवासी वृद्ध की टीएमएच में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। 2.45 लाख रु. का भुगतान नहीं होने पर प्रबंधन ने शव देने से मना कर दिया था। 
11 जून : टीएमएच में पटमदा के पारा शिक्षक रविंद्रनाथ सिंह की पत्नी सरिता की मृत्यु हो गई थी। प्रबंधन ने 1.20 लाख रु. का बिल न चुकाने पर शव रोक लिया था। 
17 जून : जमशेदपुर के बेको गांव के पारा शिक्षक तपन हेंब्रम की पत्नी तुलसी टीएमएच में जॉन्डिस के इलाज के दौरान चल बसीं। प्रबंधन ने बिल के 53 हजार में से 48 हजार रु. जमा करने के बाद भी शव नहीं दिया था। 
जमशेदपुर के अस्पतालों में हर महीने दो-तीन केस आते हैं, जिनमें बिल जमा करने पर प्रबंधन डेड बॉडी रोक लेते हैं। कुछ केस ऊपर दिए हैं..। 

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