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आरयू सहित 5 विवि में निर्दलीय, सुविवि में एबीवीपी, एमपीयूएटी में एनएसयूआई

Bhaskar News Network | Sep 12, 2018, 06:51 AM IST

सुविवि के लॉ कॉलेज में रिजल्ट पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज भास्कर न्यूज | जयपुर प्रदेशभर में छात्रसंघ चुनाव के...

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सुविवि के लॉ कॉलेज में रिजल्ट पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज

भास्कर न्यूज | जयपुर

प्रदेशभर में छात्रसंघ चुनाव के करीब 10 दिन बाद मंगलवार को परिणाम जारी हुए। राजस्थान यूनिवर्सिटी सहित प्रदेश के 5 विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय जीते। एबीवीपी ने 4 और एनएसयूआई ने 2 विश्वविद्यालयों में परचम फहराया। सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में एबीवीपी के हिमांशु बागड़ी ने निर्दलीय सुखदेव डांगी को 783 मतों से और एमपीयूएटी में एनएसयूआई के विशाल गोदारा ने एबीवीपी के दिवाकर चौधरी को 198 वोटों से हराया। राजस्थान यूनिवर्सिटी में लगातार तीसरी बार निर्दलीय प्रत्याशी जीता है। यहां विनोद जाखड़ ने एबीवीपी के राजपाल चौधरी को 1854 वोटों से हराया। एनएसयूआई के रणवीर सिंघानिया तीसरे नंबर पर रहे। आरयू में पहली बार एससी कैटेगिरी का उम्मीदवार जीता है। जोधपुर के जेएनवीयू का परिणाम पुनर्मतगणना के कारण देर रात तक जारी नहीं हुआ था। सुविव के लॉ कॉलेज के रिजल्ट को लेकर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी।

सुविवि में दूसरी बार एबीवीपी से एससी और एमपीयूएटी में चौथे साल भी एनएसयूआई से ओबीसी उम्मीदवार जीता... पढ़ें उदयपुर फ्रंट पेज

अारयू में निर्दलीय विनोद जाखड़ 1854 वोटों से विजयी

सुविवि में हिमांशु बागड़ी, एमपीयूएटी में विकास गोदारा जीते

हिमांशु बागड़ी (एबीवीपी) केंद्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष, सुविवि

783 वोटों से जीते

छात्रसंघ चुनाव परिणाम और कांग्रेस-भाजपा के लिए 3 सबक

सही टिकट वितरण

चुनाव में सही टिकट वितरण ही अहम भूमिका निभाता है। छात्रसंघ चुनाव में भी यही रहा। भाजपा-कांग्रेस का अध्यक्ष के लिए सलेक्शन कमजोर रहा, नतीजतन पांच अध्यक्ष पदों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई।

जातीय समीकरण खारिज

दोनों दलों ने अध्यक्ष पद के लिए एक जाति विशेष को ही उम्मीदवार बनाया। लेकिन परिणाम बिलकुल उलट आया। छात्रों ने जाति से ऊपर उठकर निर्दलीय उम्मीदवार को अध्यक्ष पद पर बिठा दिया। चुनावों में धन-बल भी नहीं चला।

वही जीते, जिनका जमीनी जुड़ाव

जीत का यह भी बड़ा मंत्र है। जो प्रत्याशी जीते हैं, उनका ग्राउंड कनेक्ट मजबूत था। छात्रों के बीच उनकी लोकप्रियता इस कारण थी कि वह कई महीनों से छात्रों के बीच वर्किंग कर रहे थे। इसी का नतीजा रहा कि परिणाम पक्ष में आया।