Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

RSS में झंडा होता है हेड, नहीं होता मेंबर्स का रजिस्ट्रेशन; ऐसे ही इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

DainikBhaskar.com | Jun 07, 2018, 07:12 PM IST

पूर्व राष्ट्रपति और 43 साल से कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में RSS के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए।

-- पूरी ख़बर पढ़ें --

नागपुर.पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आरएसएस मुख्यालय में डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। साथ ही उन्हें भारत मां का महान बेटा बताया। बता दें कि अब्दुल कलाम के बाद प्रणब दूसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने नागपुर में हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। बेटी शर्मिष्ठा ने दी प्रणब को नसीहत...

- बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पिता प्रणब मुखर्जी से कहा कि 'आरएसएस भी नहीं मानता है कि आप भाषण में उसकी सोच का बखान करेंगे, लेकिन बातें भुला दी जाएंगी। रहेंगे तो सिर्फ फोटो, जो फर्जी बयानों के साथ प्रसारित किए जाएंगे। नागपुर जाकर आप भाजपा-आरएसएस को फर्जी खबरें प्लांट करने, अफवाहें फैलाने का पूरा मौका दे रहे हैं। आज की घटना तो सिर्फ शुरुआत है।'

- बुधवार को कई मीडिया रिपोर्ट्स में उनके भाजपा में शामिल होने की खबरें आई थीं। शर्मिष्ठा ने इन खबरों को खंडन किया।

(इस मौके पर हम आपको RSS से जुड़े कुछ इंटरेस्टिंग फैक्ट्स बता रहे हैं)
- 91 साल पहले 27 सितंबर, 1925 को विजयादशमी के मौके पर RSS की स्थापना नागपुर में मोहिते के बाड़े नामक स्‍थान पर केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग शामिल हुए थे। आज देशभर में 50 हजार से अधिक शाखाएं और उनसे जुड़े लाखों स्वयंसेवक हैं।
- बता दें कि विश्व की सबसे बड़ी स्वयंसेवी संस्थान होने के बावजूद इसके मेंबर्स का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता और ये अपने भगवे झंडे को ही अपना हेड मानते हैं। इसकी स्थापना की प्रेरणा केशवराव को द्वितीय विश्व युद्ध में बनी यूरोपियन राइट-विंग से मिली थी। देश भर में आरएसएस के हजारों स्कूल, चैरिटी संस्थाएं और विचारों के प्रसार के लिए क्लब हैं।

Recommended