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पंडितों व ज्योतिषियों का मत/ शास्त्र सम्मत नहीं है पीओपी के गणेश की स्थापना

Dainik Bhaskar | Sep 12, 2018, 09:23 AM IST
मिट्टी की प्रतिमा व पीओपी की प्रतिमा।
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एल्युमीनियम व चमड़े की तरह पीओपी भी अशुद्ध, पर्यावरण को पहुंचाती है नुकसान

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 09:23 AM IST

भोपाल| पंडितों व पर्यावरणविदों का मानना है कि पूजा की पवित्रता बरकरार रहे और पर्यावरण को भी किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसके लिए ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की ही स्थापना की जाए। मिट्टी की प्रतिमा का पूजन इसलिए सर्वश्रेष्ठ और शुभ माना जाता है क्योंकि मिट्टी पवित्र होती है और इसमें अग्नि, वायु, जल, आकाश व पृथ्वी जैसे पंच तत्व विद्यमान रहते हैं। इसके अलावा शास्त्रों मे वर्णित है कि स्वयं माता पार्वती ने कच्ची मिट्टी की प्रतिमा बनाकर भगवान गणेश का प्राकट्य किया था।

सबका एक ही मत.... पूजन के लिए मिट्‌टी की प्रतिमा ही श्रेष्ठ

^ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में उल्लेख है कि माता पार्वती ने मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाकर उनका प्राकट्य किया था। भगवती गौरी मिट्टी से बने बालक का विग्रह बनाकर प्राण तत्व का आह्वान करती हैं। शास्त्रों में भी मिट्टी की गणेश प्रतिमा की पूजा को ही श्रेष्ठ माना गया है।
पं. सुरेंद्र विहारी गोस्वामी, भागवताचार्य
^धर्म ग्रंथों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा के समान ही मिट्टी के गणेश की पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों में मिट्टी की प्रतिमा की पूजा को ही अधिक महत्व दिया गया है। माटी के गणेश की पूजा फलदायी होती है। पं. भंवरलाल शर्मा
^मिट्टी में पंच तत्व अग्नि, वायु, जल पृथ्वी व आकाश तत्व का समावेश होता है, इसलिए यह शुद्ध व पवित्र मानी जाती है। इससे बनी प्रतिमा की पूजा श्रेष्ठ मानी गई है। पूजा में प्रतिमा की संुदरता नहीं, पवित्रता जरूरी है। पं. प्रहलाद पंड्या
^जिस तरह पूजा-पाठ आदि धार्मिक आयोजनों में चमड़ा, एल्युमीनियम आदि का उपयोग वर्जित माना गया है, उसी तरह, प्लास्टर आॅफ पेरिस से बनी प्रतिमा की पूजा करना शास्त्र सम्मत नहीं है। अंजना गुप्ता, ज्योतिषी
^धर्म ग्रंथों में मिट्टी को शुद्ध व प्रतिमा निर्माण के लिए श्रेष्ठ माना गया है। प्रतिमाओं पर हर्बल कलर होना जाना चाहिए। रासायनिक रंगों वाली प्रतिमाओं की शुद्धता में कमी होती है। पूजन सामग्री की शुद्धता का ध्यान रखते हैं, तो प्रतिमा का भी शुद्ध होना आवश्यक है।
पं. विष्णु राजौरिया