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रामायण/ रावण के वैभव को देखकर हनुमान जी भी हो गए थे मुग्ध



Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:37 PM IST

रिलिजन डेस्क. रावण को हम में से ज्यादातर बुरा मानते हैं लेकिन यह भी सही बात है कर हर प्राणी के भीतर कुछ बुराइयां के साथ कुछ अच्छाइयां भी होती हैं। रावण का सर्वनाश उसके अहंकार के कारण हुआ। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि रावण महा ज्ञानी और शिव जी का परम भक्त था। महर्षि वाल्मीकि रचित की रामायण में भी रावण के ज्ञान और सुंदरता का वर्णन मिलता है इसके अनुसार जब हनुमान जी माँ सीता की खोज में लंका पहुंचे थे तो वो भी रावण की कई खूबियों से आकर्षित हुए थे। रामायण में लिखा है हनुमानजी ने रावण के वैभव को देखते हुए कहा था कि…


दोहा
अहो रूपमहो धैर्यमहोत्सवमहो द्युति:।
अहो राक्षसराजस्य सर्वलक्षणयुक्तता॥


अर्थ- रावण को देखते ही हनुमान मुग्ध हो जाते हैं और कहते हैं कि रूप, सौन्दर्य, धैर्य, कान्ति तथा सर्वलक्षणयुक्त होने पर भी यदि इस रावण में अधर्म न होता तो यह देवलोक का भी स्वामी बन जाता।

 

ब्रह्मा जी के पुत्र थे रावण के दादा


- वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पौत्र था अर्थात् उनके पुत्र विश्रवा का पुत्र था। विश्रवा की वरवर्णिनी और कैकसी नामक दो पत्नियां थी। वरवर्णिनी ने कुबेर को और कैकसी ने रावन को जन्म दिया था।


- कैकसी के पिता राक्षस कुल के थे और इसी कारण रावण में भी कई राक्षसों वाले अवगुण थे। रावण के अवाला कैकसी ने कुंभकरण, विभीषण, अहिरावण, खर और दूषण का जन्म दिया।


- रावण ने ही शिव तांडव की रखना की थी वो तंत्र, ज्योतिष और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञाता था। इस कारण देवता भी उससे डरते थे।

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