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क्या आपका बच्चा भी हकलाता है? मेडिसिन नहीं मोटिवेशन से दूर होगी प्रॉब्लम

Dainikbhaskar | May 28, 2018, 02:16 PM IST

हकलाने की समस्या ज्यादातर लड़कों में देखी जाती है। बच्चे को मोटिवेट करने से अच्छे रिजल्ट सामने आते हैं।

काउंसलिंग और कुछ थैरेपीज से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

यूटिलिटी डेस्क. अधिकतर माता-पिता बच्चों के हकलाने से परेशान हो जाते हैं। ये कोई गंभीर बात नहीं है, लेकिन इस वजह से बच्चे का मजाक उड़ाया जाता है या अन्य लोग नकल करते हैं तो बच्चे में धीरे-धीरे हीन भावना आने लगती है। इस समस्या से निपटने के लिए माता-पिता कुछ बातों का ध्यान रखें। खास बात है कि इसके समाधान के लिए मेडिसिन के साथ मोटिवेशन भी जरूरी है। जानते हैं किन बातों का रखें ख्याल...


1. इसका इलाज किसी दवा से नहीं, बल्कि स्पीच थैरेपिस्ट और मनोवैज्ञानिक की मदद से आसानी से किया जा सकता है।

2. पहले बच्चे के हकलाने का कारण जानें। बच्चे के मन में किसी प्रकार का भय हो तो उसे दूर करने की कोशिश आपको करनी चाहिए।

3. बच्चे के मन में आत्मविश्वास पैदा करें। उसके दिमाग से यह बात दूर करें कि उसमें किसी प्रकार का दोष है।

4. थैरेपिस्ट बच्चों से उन्हीं शब्दों को बार-बार बुलवाते हैं, जिन्हें बोलने में उन्हें परेशानी होती है। निरंतर अभ्यास से यह संभव हो सकता है।

5. अगर बच्चा किसी शब्द को बोलते समय अटकता है तो धैर्य से उसकी बात सुनें और उसे ही अपना वाक्य पूरा करने दें।

6. बच्चे का मजाक न उड़ाएं। उसको प्यार से समझाएं। जब वह धीरे-धीरे शब्द बोले तो उसकी हौंसला अफजाई करें।

लड़कों में ज्यादा होती है ये समस्या
आमतौर पर हकलाहट या स्टैमरिंग तीन से पांच साल की उम्र के बच्चों में शुरू हो जाती है। पांच से नौ साल के बच्चों में ये धीरे-धीरे कम हो जाती है और 12-13 साल के बच्चों में हकलाहट की परेशानी बहुत कम हो जाती है। लगभग 5 प्रतिशत बच्चों को हकलाने की परेशानी रहती है। लड़कियों के मुकाबले लड़कों में यह दोष 5 गुना ज्यादा होता है। वैसे तो यह एक सामान्य दोष है, इसके कई कारण हो सकते हैं।


क्या होते हैं कारण
भाषा पर अच्छी पकड़ न होना।
बहुत ज्यादा भावुक होना।
डरना और मानसिक तनाव।
एकाग्रता में कमी और असमंजस।

अगर बच्चा किसी शब्द को बोलते समय अटकता है तो धैर्य से उसकी बात सुनें और उसे ही अपना वाक्य पूरा करने दें।