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राजनीति/ झाविमो ने कहा- झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे

Dainik Bhaskar | Sep 11, 2018, 06:57 PM IST
झारखंड विकास मोर्चा के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह। (फाइल)
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  • स्वास्थ्य मंत्री के विस क्षेत्र में बुखार से तड़पकर मरीज दम तोड़ रहे हैं

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 06:57 PM IST

रांची. झारखंड विकास मोर्चा के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि झारखंड का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह भगवान भरोसे है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री के खुद के विधानसभा क्षेत्र के अमवा गांव में आवागमन व मुकम्मल स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं होने की वजह से बुखार से तड़पकर मरीज दम तोड़ रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री के क्षेत्र में अवस्थित कोल्हान प्रमंडल के सबसे बड़े अस्पताल एमजीएम की चिकित्सीय व्यवस्था बेपटरी हो, तो भला इन महानुभावों से राज्य की जनता क्या उम्मीद कर सकती है।

सिमडेगा की घटना ने सरकार की इस योजना की पोल खोलकर रख दी
उन्होंने कहा- जो मंत्री व मुख्यमंत्री अपने इलाके के अस्पताल को दुरूस्त नहीं कर सकते, वे भला रिम्स जैसे संस्थान की व्यवस्था क्या सुधारेंगे। वहीं, दूसरी ओर सिमडेगा सदर अस्पताल में एक अदद एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण एक नवजात राज्य की सड़ी-गली स्वास्थ्य व्यवस्था की भेंट चढ़ जाता है। सिंह ने कहा कि राज्य के सीएम ने 15 नवम्बर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की गरिमामयी उपस्थिति में जीपीएस सहित अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस निशुल्क 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा प्रारंभ किया था। इसको संचालित करने के लिए 1472 कर्मचारियों की नियुक्ति करने की बात कही गई थी। इसका संचालन सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से करने की बात कही गई थी ताकि किसी भी जरूरतमंद को परेशानी नहीं हो। अभी लगभग 250 एंबुलेंस चलने की बात सामने आ रही हैं परंतु सिमडेगा की घटना ने सरकार की इस योजना की पोल खोलकर रख दी है।

स्वास्थ्य मंत्री को तो अविलंब बर्खास्त कर देना चाहिए
उन्होंने कहा- जब किसी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मूल काम को छोड़कर शिक्षा मंत्री का काम करने लगेंगे, वह भी अपने हित का तो प्रदेश की हालत बदतर तो होगी ही। स्वास्थ्य मंत्री को तो अविलंब बर्खास्त कर देना चाहिए। वहीं, सीपी सिंह द्वारा पुलिस सहायता केन्द्र का नाम बदलकर वसूली केन्द्र रखने की बात पर उन्होंने कहा कि सीपी सिंह सरकार में हैं। अगर उनके पास सबूत हैं तो उन्हें बयानबाजी की बजाय ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, कई पुलिस वालों ने भी मंत्री से पूछा है कि क्या आप भी मंत्रीमंडल का नाम बदलकर कमीशनखोर या घूसखोर मंत्रिमंडल रखिएगा।