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राजनीति/ अंबिकापुर सीट से नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव के खिलाफ किन्नर ने ठोंकी ताल

Dainik Bhaskar | Sep 11, 2018, 05:51 PM IST
किन्नर मुस्कान
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

  • छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव :निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ेंगी चुनाव
  • सरगुजा जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर है अभी कांग्रेस का कब्जा

अंबिकापुर.छत्तीसगढ़ का विधानसभा चुनाव इस बार रोचक होने वाला है। अंबिकापुर सीट से किन्नर मुस्कान ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंकने की तैयारी कर ली है। ऐसा पहली बार है कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कोई निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में होगा।Advertisement

सरगुजा महाराज के सामने रोचक होगा मुकाबला

  1. लंबे समय से है कांग्रेस का दबदबा

    सरगुजा जिले की तीनों सीटों अंबिकापुर, सीतापुर और लुण्ड्रा फिलहाल कांग्रेस के कब्जे में है। यहां पर हमेशा से कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। अंबिकापुर और लुण्ड्रा दोनों सीटें 2008 से कांग्रेस के खाते में हैं, वहीं सीतापुर में 2003 से कांग्रेस का कब्जा बरकरार है। यहां तक कि जब 2003 में पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर थी, फिर भी सीतापुर में कमल नहीं  खिल सका। 

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  2. वोट बढ़ा, लेकिन हाथ नहीं आई सीट

    2008 के मुकाबले 2013 के चुनाव में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा, लेकिन पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं आई। 2003 की लहर में भाजपा ने यहां की तीन में दो सीटों लुण्ड्रा व अंबिकापुर में जीत हासिल की थी। पार्टी को करीब 47 फीसद से अधिक वोट मिले थे। इसके बाद के दोनों चुनावों में क्रमश: 24 और करीब 39 फीसद वोट मिले हैं, लेकिन सीटें नहीं जीत पाए।

  3. चुनाव को लेकर किन्नर समुदाय में उत्साह

    चुनाव को लेकर किन्नर समुदाय में खासा उत्साह है। राजनीति के क्षेत्र में अब धीरे-धीरे किन्नर भी अपनी किस्मत आजमाने के लिए राजनीतिक मैदान में उतर रहे हैं। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की सोहागपुर विधानसभा से सबसे पहली किन्नर शबनम मौसी के चुनाव लड़ने के बाद, जबलपुर से एक पार्षद, कटनी की एक महापौर और रायगढ़ में महापौर मधु किन्नर के बाद अब सरगुजा में भी एक किन्नर राजनीति के महासमर में कूद पड़ी हैं। रायगढ़ नगर निगम की महापौर मधु किन्नर सहित अन्य सहयोगियों की मौजूदगी में मंगलवार को मुस्कान ने अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी तौर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। 

     

     

    कंटेंट/फोटो : कौशल स्वर्णबेर