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ऑर्गन ट्रांसप्लांट की अनोखी कहानी: एक को दिल चाहिए था, दूसरे को फेफड़े तो दोनों महिलाओं ने आपस में एक्सचेंज कर लिया

बढ़ती उम्र और बिगड़ती हालत देखते हुए हॉस्पिटल ने दोनों में एक-दूसरे के अंग ट्रांसप्लांट किए जो सफल रहे

Dainikbhaskar.com | Aug 05, 2018, 08:23 AM IST

हेल्थ डेस्क.    अमेरिका में अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) का एख अनोखा मामला सामने आया है। एक महिला को दिल की जरूरत थी तो दूसरी महिला को फेफड़े की। दोनों महिलाओं ने आपस में अंग एक्सचेंज कर लिए। फेफड़े की गंभीर समस्या से जूझ रही टैमी ग्रिफिन और हार्ट ट्रासप्लांट के लिए लिंडा कार 30 महीने से इंतजार कर रहीं थीं। दोनों के नाम कैलिफोर्निया के हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्टर्ड थे। ऑपरेशन के बाद दोनों स्वस्थ हैं और 2-7 अगस्त तक होने वाले ट्रांसप्लांट गेम्स ऑफ अमेरिका 2018 में हिस्सा ले रही हैं। यह एक एथलेटिक इवेंट है जिसमें सैकड़ों ऑर्गन डोनर्स और रेसीपिएंट्स शामिल होते हैं। 

 

ऑपरेशन से पहले दोनों महिलाओं की हालत नाजुक थी : लिंडा की उम्र 55 साल है। इनके दिल की हालत तेजी से बिगड़ रही थी और डॉक्टर ने ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प बताया था। ऐसी ही गंभीर स्थिति से टैमी ग्रिफिन भी जूझ रही थीं। टैमी को भी डॉक्टर ने जल्द ही लंग ट्रांसप्लांट के लिए कहा था लेकिन सही मैच न मिलने के कारण वे इंतजार कर रही थीं। लिंडा के फेफड़े ठीक थे और टैमी के हार्ट में कोई परेशानी नहीं थी। दोनों मरीजों की स्थिति सामने आने के बाद डॉक्टर्स ने दोनों का डोमिनोज प्रोसिजर से ट्रांसप्लांट किया। ट्रांसप्लांट के एक महीने बाद लिंडा टैमी से मिलीं। दोनों बेहद खुश थीं और एक-दूसरे को धन्यवाद दिया। 

क्या है डोमिनोज प्रोसिजर : इस प्रक्रिया में एक मरीज अपना अंग दूसरे को डोनेट करता है और बदले में उस पेशेंट्स का एक अंग पहले वाले डोनर में ट्रांसप्लांट किया जाता है। ऐसा उस स्थिति में किया जाता है जब दोनों को अलग-अलग ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। ट्रांसप्लांट किए जाने वाले अंग का स्वस्थ होना और दोनों मरीजों की रजामंदी होना भी जरूरी है।

क्या थी दोनों मरीजों की बीमारी : अमेरिका की ऑरेगन में रहने वालीं टैमी सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित थीं। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जिसमें फेफड़े की नलियां ब्लॉक हो जाती हैं। फेफड़ों के सिकुड़ने के कारण धीरे-धीरे यह समस्या जान का जोखिम बढ़ा रही थी। हालत यह थी कि टैमी को 24 घंटे ऑक्सीजन पर निर्भर रहना पड़ रहा था। बीमारी के कारण टैमी का हार्ट भी अपनी जगह से खिसक गया था। वहीं, कैलिफोर्निया की रहने वाली लिंडा  पिछले 20 साल से दिल के रोग एरिथमोजेनिक राइट वेंट्रीकुलर डिस्प्लेक्सिया से पीड़ित थीं। इस रोग में हार्ट को इलेक्ट्रिकल सिग्नल जरूरत के मुताबिक नहीं मिलते और धड़कन असामान्य हो जाती है। 

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