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स्वामी विवेकानंद से सीख सकते हैं कैसे कर सकते हैं मन को एकाग्र

स्वामी विवेकानंद के कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे हैं।

dainikbhaskar.com | Jul 12, 2018, 02:14 PM IST

रिलिजन डेस्क। आज कई लोगों के पास सुविधाएं तो बहुत हैं, लेकिन वे मन से अशांत हैं। जब तक मन शांत नहीं होगा, तब तक जीवन सुखी नहीं हो सकता। मन को नियंत्रित करने पर ही शांति मिल सकती है। इसके लिए चिंताओं को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। यहां जानिए स्वामी विवेकानंद के जीवन की एक प्रचलित घटना,  जिससे हम समझ सकते हैं कि मन की शांति के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

 

ये है प्रेरक प्रसंग

- स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेंद्र था। लोग ऐसा कहते हैं कि उनके साथ कोई दैवीय शक्ति भी थी। मन इतना एकाग्र था कि एक बार कोई चीज पढ़ ली या देख ली, तो फिर एक-एक अक्षर याद रखते थे। कई लोग उनकी इस प्रतिभा के कायल थे।

- एक बार वे अपने एक विदेशी मित्र से मिलने गए। जिस कमरे में वे बैठे थे, वहां कुछ किताबें भी रखी थीं। स्वामीजी के मित्र को कुछ काम आ गया और वो थोड़ी देर के लिए बाहर चले गए।

- खाली समय देख विवेकानंद ने वहां पड़ी एक किताब उठा ली। वह किताब उन्होंने जीवन में पहले कभी नहीं पड़ी थी।

- कुछ देर बाद मित्र काम निपटाकर लौटा, तक तक उन्होंने किताब पूरी पढ़ ली। मित्र ने उन्हें परखने के लिए पूछा क्या वाकई पूरी किताब पढ़ ली है। विवेकानंद बोले हां, काफी अच्छी किताब है। उन्होंने उसकी व्याख्या प्रारंभ की। यह तक बता दिया कि किस पृष्ठ पर क्या लिखा है, कहां प्रूफ की गलती रह गई।

- मित्र ने उनसे पूछा कि इतनी जल्दी किताब को पढ़कर याद कैसे रख लिया? मित्र ने कहा कि मैं तो अभी तक उसे पढ़ने के लिए अपना मन तक नहीं बना सका। अपने आप को एकाग्रचित्त करना चाहता हूं, लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहा हूं।

- विवेकानंद ने जवाब दिया कि मैं हमेशा अपने मन पर किसी चिंता या समस्या को हावी नहीं होने देता। इस कारण जहां चाहता हूं, वहीं शांति मिल जाती है। मन पर काबू कर लिया तो फिर कभी भी शांति खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

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