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टू व्हीलर 200 तो फोर व्हीलर की रजिस्ट्रेशन 500 रु. महंगी, शराब-बीयर के रेट भी बढ़ेंगे

Bhaskar News | Jun 28, 2018, 02:35 AM IST

नगर निगम की हाउस मीटिंग में आएगा काउ सैस लगाने का एजेंडा, बिजली बिल प्रति यूनिट 2 पैसे महंगा

यहां से जुटाए 25 लाख रु. गायों की
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चंडीगढ़.नगर निगम शहर में काउ सैस लगाने जा रहा है। इसके लगने से बिजली का बिल और नए व्हीकल की रजिस्ट्रेशन महंगी हो जाएगी। टू व्हीलर की रजिस्ट्रेशन 200 रुपए और फोर व्हीलर की रजिस्ट्रेशन करवाने पर 500 रुपए काउ सैस के नाम से लाइसेंसिंग अथॉरिटी काे देने पड़ेंगे। बिजली के बिल की प्रति यूनिट पर 2 पैसे काउ सैस के लगेंगे, जबकि देसी शराब की बोतल पर 5 रुपए, व्हिस्की की बोतल पर 10 रुपए अौर बीयर की बोतल पर 5 रुपए काउ सैस लगेंगे। इसका एजेंडा नगर निगम हाउस मीटिंग में शुक्रवार को आ रहा है।

एमसी को 25 लाख रुपए से ज्यादा हर महीने मिलेंगे: काउ सैस से मिलने वाले रेवेन्यू को एमसी गायों की देखभाल में ही खर्च करेगा। यह सैस लगाने के बाद एमसी को 25 लाख रुपए से ज्यादा हर महीने मिलेंगे। शहर के 2 लाख 20 हजार बिजली कंज्यूमर को प्रति यूनिट पर 2 पैसे काउ सैस देना पड़ेगा। इसी से एमसी को महीने में 20 लाख रुपए आने लगेंगे। डोमेस्टिक कंज्यूमर का बिल हर दो महीने में आता है, जबकि कमर्शियल कंज्यूमर का बिल हर महीने आता है। नगर निगम ही हर महीने बिजली का बिल 3.25 करोड़ रुपए पे करता है। इसमें स्ट्रीट लाइट और वाॅटर सप्लाई की पंपिंग मशीनरी और मोटर का बिल शामिल होता है।

1000 गायों के चारे पर ही हर साल 1 करोड़ रुपए आता है खर्च:नगर निगम शहर से आवारा और पालतू पशुओं को पकड़कर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में बनी दो गौशाला में रखता है। इन दोनों कैटल पौंड में एक हजार पशुओं को रखा जा रहा है। दोनों गऊशाला में गायों के चारे, गुड़ आदि पर 1 करोड़ रुपए खर्च होता है। निगम पालतू पशुओं को छोड़ते समय ऑनर से प्रति पशु दिन के हिसाब से जुर्माना लेता है। आवारा पशुओं के सूखे और हरे चारे के अलावा दवाओं पर खर्च कर रहा है। इसके अलावा सेक्टर-45,मलोया और सेक्टर 25 की गौशाला को एनजीओ चला रही है। पकड़ी गई गायों को एमसी तीनों गौशालाओं को दे देती है। तीनों गौशाला में बंद गायों की देखरेख एनजीओ द्वारा की जा रही है। लेकिन शहर में मरने वाली गायों को दफनाया नहीं जा रहा है। बल्कि मरे हुई गायों को खाल उतार कर जानवरों के नोंचने के लिए छोड़ा जाता है बाद में ठेकेदार द्वारा हडि्डयाें को उठाकर बेचा जाता है। अब काऊ सैस लगने से एमसी गारबेज प्रोसेसिंग यूनिट के पास इलेक्ट्रिक क्रीमेटोरियम बनाएगा।