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लापरवाही/ चार वैल्युअर ने जांची कॉपी, उत्तर सही था फिर भी दिए जीरो



 नंबर क्यों काटे गए इस बात का कहीं कोई उल्लेख नहीं

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 02:34 AM IST

रायगढ़. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाओं में कॉपी जांच करने में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। कॉपी का मूल्यांकन करने वालों ने सही उत्तर पर भी शून्य अंक दिया है। 80% प्राप्त करने वाले नटवर स्कूल के स्टूडेंट्स ने जब अंक कम मिलने पर अपनी कॉपी मंगवाई तो  फिजिक्स, अंग्रेजी व हिंदी की उत्तर पुस्तिकाओं को देखने के बाद वे हतप्रभ रह गए। इन कॉपियों में लिखे गए सही उत्तर पर एक को शून्य अंक तो शेष स्टूडेंट्स को 5 में आधे से भी कम अंक दिए गए हैं।

 

कॉपी में नंबर क्यों काटे गए इस बात का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। 9 मई को माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 12वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया था। अंक देखने के बाद नटवर स्कूल के टॉपर फिजिक्स समेत दूसरे कई विषयों पर मिले नंबरों से खुश नहीं थे। 80% से अधिक अंक मिलने के कारण वे पुनर्मूल्यांकन के लिए भी आवेदन नहीं कर सकते थे।

 

इसलिए आखिर में उन्होंने बोर्ड को एक-एक विषय के लिए 650 रुपए शुल्क जमा कर विभिन्न विषयों की उत्तर पुस्तिकाएं मंगवाईं। जिसमें उनके 7-8 नंबर बढ़ रहे हैं। सेट सी के प्रश्न पत्र में प्रश्न नंबर 5 में लॉजिक गेट का चित्रण कर सत्यता सारिणी बनाने को कहा गया है।

 

12 वीं विज्ञान संकाय में 88% अंक हासिल करने वाले सुनील सिंह ने किताब में बताए गए नियमों के अनुसार गेट की पहचान करते हुए सत्यता सारिणी बनाई है। कॉपी जांच करने वालों ने उसे गलत बताया।  गलत क्यों इस बात का भी कहीं कोई उल्लेख नहीं किया है।

 

प्रश्न क्रमांक 8 में 12D एवं 2D क्षमता वाले लेंस को एक दूसरे के संपर्क में रखे जाने पर संयुक्त लेंस की क्षमता पूछी गई है। किताब में इस प्रश्न का उत्तर 10 है, उत्तर पुस्तिका में स्टूडेंट्स ने किताब के अनुरूप उत्तर 10 होना बताया है, लेकिन उसे सिर्फ 1 नंबर मिला है। इसी तरह 88.6% अंक प्राप्त करने वाले शैलेंद्र बंजारे के अंग्रेजी ग्रामर में अंक काटे गए जबकि एक-एक नंबर के दो प्रश्नों का उत्तर उन्होंने सही लिखा था।

 

सीधी बात: गलती हुई है तो नंबर दिए जाएंगे - वीके गोयल, स्कूल शिक्षा सचिव रायपुर

 

1. कॉपी चार पर्यवेक्षकों ने जांच की सही उत्तर पर शून्य नंबर दिया, गलती किसी को क्यों नहीं दिखी?
- आप उनको बोलिए न एक आवेदन कर देंगे, फोटो कॉपी भी लगाएंगे और गलतियों का उल्लेख कर देंगे।


2. निर्देश दिए गए थे, नंबर क्यों काटे गए इस बात का उल्लेख जरूरी है, लेकिन कॉपी में ऐसा नहीं है?
- देखिए मैंने वेल्युएशन के बाद ज्वाइन किया है, मुझे जो जानकारी है उसमें सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण नहीं मिला था।

 

3. प्रशिक्षण नहीं मिला तो उनसे कॉपी जांच नहीं कराना चाहिए था, स्टूडेंट्स के साथ अहित नहीं होता?

- मैंने बताया न कि मैं नहीं था, इस बार हम कोशिश कर रहे हैं, 30 हजार में 27 हजार अप्रशिक्षित हैं।

 

4. उन्हें कब प्रशिक्षित किया जाएगा, इस बार भी गलतियां होंगी इसके लिए क्या तैयारी है, आपकी?
- इस बार हम स्टेट में प्रशिक्षण करा रहे हैं, इसके बाद हम कुछ प्लानिंग करेंगे की सभी को प्रशिक्षित कर सके।

 

5. लेकिन फिलहाल नुकसान तो स्टूडेंट्स का हो रहा है, उन्हें कैसे न्याय मिलेगा?
- वे अप्लाई करें, मैं अपने स्तर पर जांच कराता हूं, यदि उनके साथ इन-जस्टिस हुआ है तो नंबर दिए जाएंगे।

एक्सपर्ट कह रहे कॉपी में उत्तर सही

 

फिजिक्स के स्थानीय विशेषज्ञ नंबर बढ़ने की बात कह रहे हैं। कुमी बहाल में पदस्थ फिजिक्स के व्याख्याता प्रकाश सिंह ने सुनील की कॉपी जांचने के बाद भास्कर को बताया कि कॉपी में पांच नंबर बढ़ रहे हैं। वहीं उन्होंने पीयूष अग्रवाल की कॉपी में नंबर बढ़ने की बात कही है। गेरवानी हायर सेंकेड्री स्कूल के फिजिक्स व्यख्याता रविकांत साहू ने भी स्टूडेंट की कॉपी देखने के बाद उत्तर सही होने की पुष्टि की है।

2013 टॉपर की कॉपी में भी थी त्रुटि

 


साल 2013 में सुधांशु तिवारी ने 10 वीं में पूरे राज्य में टॉप किया था। उन्हें सामाजिक विज्ञान विषय में 86 नंबर मिले थे। जब माशिमं से अपनी उत्तर पुस्तिका मंगाई और देखा तो काफी अंतर मिला। माशिमं के तीन अगल-अलग एक्सपर्ट से कॉपी की जांच कराई। पहले ने 96 दूसरे ने 94 और तीसरे 97 नंबर दिए, लेकिन अंतर 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं मिला इसलिए नंबर नहीं बढ़ाए गए। पिता ने कोर्ट में चुनौती देना चाहा, लेकिन अफसरों ने प्रक्रिया में समय लगने की बात कही जिसके बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल लिया।

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