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यहां रहने वाले बच्चे गूगल पर ढूंढ रहे हैं 'मरने के तरीके', किसी ने खुद पर पेट्रोल छिड़का तो किसी ने नुकीली चीज को निगल लिया

DainikBhaskar.com | Aug 29, 2018, 02:07 PM IST

फिलहाल नाउरू द्वीप पर 939 शरणार्थी रहते हैं, जिनमें से 139 बच्चे हैं।

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गैजेट डेस्क. ऑस्ट्रेलिया के नाउरू अप्रवासन केंद्र में 900 शरणार्थी रहते हैं और इनमें से 120 से ज्यादा बच्चे भी हैं। इन बच्चों में एक गंभीर समस्या देखने को मिल रही है और ये बच्चे गूगल पर 'मरने के तरीके' खोज रहे हैं। इंटरनेशनल हेल्थ एंड मेडिकल सर्विसेस (IHMS) से जुड़े सायकाइट्रिस डॉ. वेरनॉन रेनॉल्ड्स ने ऑस्ट्रेलियाई एजेंसी एबीसी को कुछ डॉक्यूमेंट्स दिए हैं, जिसमें इस बात की जानकारी दी है। रेनॉल्ड्स अगस्त 2016 से अप्रैल 2018 तक करीब दो सालों तक इस अप्रावसन केंद्र में सायक्राइटिस के तौर पर काम कर चुके हैं।

खुद पर छिड़क लिया पेट्रोल : डॉ. रेनॉल्ड्स ने बताया कि 'इसी साल जून में अप्रावसन केंद्र में रह रहे एक 14 साल के बच्चे ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर जान देने की कोशिश की थी। जबकि एक 10 साल के बच्चे ने भी जान देने के लिए किसी नुकिली चीज को निगल लिया था।'
- उन्होंने बताया कि इस केंद्र में रह रहे ज्यादातर शरणार्थी बच्चे गूगल पर जान देने के और खुद को नुकसान पहुंचाने के तरीके ढूंढ रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि ये बच्चे मर भी सकते हैं।

बच्चों ने खेलना और बात करना बंद कर दिया : डॉ. रेनॉल्ड्स के मुताबिक, बच्चों ने खाना-पीना, दूसरों से बात करना और खेलना बंद कर दिया है। वे सारा दिन सिर्फ बिस्तर पर ही पड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि 'इन बच्चों का इलाज और देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।'
- उन्होंने बताया कि 'अप्रैल 2018 में वापस आने के बाद मैं बच्चों की देखभाल के लिए फिर से वहां जाना चाहता था, लेकिन मुझे वहां नहीं जाने दिया गया।'
- वहीं IHMS में काम करने वालीं सामाजिक कार्यकर्ता फियोना ओवन्स ने भी बताया कि वे बच्चे दिनभर एक ही चीज के बारे में सोचते रहते हैं कि उन्हें मरना कैसे है और वे इसे गूगल पर सर्च करते हैं।

अभी 939 शरणार्थी नाउरू में रहने को मजबूर : फियोना ओवन्स के मुताबिक, अक्टूबर 2016 में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिकी सरकार के बीच शरणार्थियों को नाउरू पर बसाने के लिए एक समझौता हुआ था। जिसके बाद मई 2018 तक सिर्फ 250 शरणार्थियों को ही बसाया गया है, लेकिन 139 बच्चों समेत 939 शरणार्थी अभी भी नाउरू द्वीप पर ही रह रहे हैं।
- उन्होंने बताया कि 'यहां रह रहे ज्यादातर ईरानियन और सोमैलियन परिवार अमेरिका जाना चाहते हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने जनवरी 2017 में ईरान, इराक, सूडान जैसे 7 मुस्लिम देशों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके चलते वे लोग वहां नहीं जा सकते।'