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टॉयलेट ब्लॉक पर विज्ञापन में घपला, केंद्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल सतिंदर सिंह ने एडवाइजर को दी शिकायत

Bhaskar News | Sep 09, 2018, 06:30 AM IST

टेंडर में टर्म एंड कंडीशंस बदलकर डिफाल्टर कंपनी को देना चाहते हैं काम

चंडीगढ़ नगर निगम ( फाइल फोटो )
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चंडीगढ़. नगर निगम की ओर से पब्लिक टॉयलेट्स की आॅपरेशन एंड मेंटेनेंस का टेंडर शुरू से ही विवादों में रहा है। पहले यह मामला हाईकोर्ट में चला गया और अब केंद्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल पूर्व काउंसलर सतिंदर सिंह ने निगम के अफसरों पर डिफाल्टर कंपनियों को फेवर देने का आरोप लगाया है। उन्होंने नगर निगम के अफसरों को लताड़ा है। यही नहीं टॉयलेट ब्लॉक के टेंडर में इस घपले की शिकायत सतिंदर ने एडवाइजर परिमल राय से भी की है।

उन्होंने परिमल राय से मुलाकात की और बताया कि कैसे निगम के कर्मचारी किसी एक खास कंपनी को फेवर देने के लिए नियम तक बदल देते हैं। परिमल राय ने सतिंदर को यकीन दिलाया है कि जिन कंपनियों ने बकाया रकम देनी है वह टेंडर प्रोसेस में भाग नहीं ले पाएंगी।

काम बदलकर एडवर्टाइजमेंट का कर दिया :पहले जो टेंडर हुआ उसमें लिखा था कि 180 टॉयलेट की पीपीपी मोड पर ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस को जरूरी रखा गया था। लेकिन इस बार जो टेंडर हुआ उसमें टॉयलेट्स की मेंटेनेंस को दरकिनार करते हुए लिखा गया कि 6 हजार, 8 हजार या 10 हजार स्क्वेयर फीट की आउटडोर एडवर्टाइजमेंट से जुड़े काम किए हों वह एप्लाई कर सकते हैं। यही नहीं लेडीज टॉयलेट में फीमेल अटेंडेंट की कंडीशन को भी हटा दिया गया जबकि पुराने टेंडर में इनका होना कंपलसरी था। यह सबकुछ एक खास कंपनी को फेवर देने के लिए किया जा रहा है।

निगम ने नहीं की कोई स्टडी :सतिंदर ने लिखा कि ऐसा लगता है कि नगर निगम ने इस टेंडर को निकालने से पहले प्रॉपर स्टडी नहीं की क्योंकि टेंडर में लिखा है कि सबसे लोएस्ट आने वाली कंपनी व सबसे हाएस्ट आने वाली कंपनी को यह 15 साल का टेंडर मिलेगा। टेंडर हाएस्ट या लोएस्ट को मिलना है यह पहले से तय होना चाहिए। पहले टेंडर में लिखा था कि एक व्यक्ति की शिफ्ट 8 घंटे ही होगी। नए टेंडर में ऐसा नहीं किया गया ऐसे में साफ सफाई रहे इसका ध्यान कैसे रखा जाएगा जब ड्यूटी के टाइमिंग्स तय नहीं है। पहले जो टेंडर हुआ उसमें लिखा था कि यह पब्लिक टॉयलेट्स सुबह 5 से रात 11 बजे तक खुलेंगे लेकिन अब बदलकर टाइमिंग्स सुबह 6 से रात 10 बजे तक किए गए हैं।

जो कंपनियां डिफाल्टर व भी एलिजिबल :नए टेंडर के जरिए जिस कंपनी को यह टेंडर अलॉट होगा वह टॉयलेट ब्लॉक पर एडवरटाइजमेंट के जरिए रेवेन्यू कमाएगी। निगम ने टेंडर में जानबूझकर शर्तें इस तरह से बदल दी डिफॉल्टर कंपनियों को फायदा मिल सके। यानी जिन्होंने पिछले कुछ सालों से निगम की बकाया रकम को जमा नहीं करवाया है वह भाग ले सकेंगी। निगम में ऐसी 7 कंपनियां हैं जिन्होंने निगम से ही एडवर्टाइजमेंट से जुड़ा काम लिया लेकिन बाद में निगम को रकम जमा नहीं करवाई। इन 7 कंपनियों ने कुल 30 करोड़ रुपए की बकाया रकम जमा करवानी है।

नए टेंडर क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स की जगह क्रिमिनल कनविक्शन: निगम के पब्लिक हेल्थ डिविजन नंबर 4 की आेर से लगाए गए इस टेंडर में अफसरों ने बहुत ही शातिर तरीके से शर्तों को बदल दिया। पहले के टेंडर्स में लिखा होता था कि अगर किसी कंपनी पर क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स चल रही हैं तो वह भाग नहीं ले सकती यानी कि दांडिक अपराधों के लिए प्रक्रिया अभी चल रही है तो भी कंपनी भाग नहीं ले सकती। इस शर्त को बदलकर क्रिमिनल कनविक्शन का शब्द इस्तेमाल किया गया। इसका मतलब यह है कि जब तक कंपनी आपराधिक दोषी सिद्ध नहीं हो जाती वह भाग ले सकती है। एक कंपनी पर सीबीआई ने एफआईआर तक दर्ज कर रखी है और सतिंदर ने आरोप लगाया है कि कंपनी को फेवर देने के लिए टेंडर की शर्तों को क्रिमिनल प्रोसिडिंग से बदलकर क्रिमिनल कनविक्शन किया गया है।