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शारदीय नवरात्र/ नौका पर आएंगी मां दुर्गे और हाथी पर करेंगी प्रस्थान



Dainik Bhaskar | Sep 12, 2018, 11:34 AM IST

धनबाद. जिले भर में दुर्गोत्सव की तैयारी शुरू हो गई है। जगह-जगह पूजा कमेटियों ने पंडालों का निर्माण भी शुरू कर दिया है। बनारस पंचांग के अनुसार, 9 अक्टूबर को महालया है। 10 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापन के साथ 10 दिनों का शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएगा। विजयादशमी 19 अक्टूबर को पड़ेगी। पंडित रमेश चंद त्रिपाठी का कहना है कि इस साल मां दुर्गा का आगमन नौका पर होगा और वे हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी। प्रतिपदा बुधवार को है और यह दिन बहुत शुभ माना गया है, इसलिए मां दुर्गा का आगमन बहुत ही शुभ है। शास्त्रों के अनुसार, नौका पर माता दुर्गा के आगमन और हाथी पर प्रस्थान के कारण इस बार अतिवृष्टि हो सकती है, हालांकि इससे फसल वगैरह की हानि नहीं होगी।

कब-क्या होगा नवरात्र के दौरान?

  1. कलश स्थापन के लिए पूरा दिन शुभ

    बनारस पंचांग के अनुसार, 9 अक्टूबर को सुबह 9:16 बजे प्रतिपदा तिथि प्रवेश करेगी, जो अगले दिन 10 अक्टूबर को सुबह 8:08 बजे तक है। पंडित रमेश चंद्र त्रिपाठी और पंडित सुधीर पाठक का कहना है कि उदयातिथि के आधार पर 10 अक्टूबर को कलश स्थापना की गई जाएगी। पूरा दिन इसके लिए शुभ है। शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त को देवी-देवताओं की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसलिए इसी मुहूर्त में कलश स्थापना सर्वोत्तम होगा।

  2. 16 अक्टूबर को सप्तमी पर पंडालों में खुलेंगे माता के पट

    पंडितों को कहना है कि इस बार नवरात्र में कोई तिथि विलुप्त नहीं हो रही है। आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को मां दुर्गे के शैल पुत्री स्वरूप की पूजा की जाएगी। 16 अक्टूबर को दिन के 10:51 बजे तक सप्तमी तिथि है। इसी दिन पंडालों में माता के पट खुलेंगे और वे श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी।

  3. 17 को कन्या पूजन, 19 को हवन

    पंडित रमेश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि 17 अक्टूबर को अष्टमी तिथि पड़ रही है। नवरात्र में महाअष्टमी को गौरी स्वरूप मां दुर्गे की पूजा-अर्चना की जाती है। महाअष्टमी को ही कन्या पूजन की परंपरा है। 18 अक्टूबर गुरुवार को दिन के 2:32 तक नवमी तिथि पड़ रही है। जो लोग नवरात्र व्रत रखते हैं वे नवमी तिथि में हवन आदि कर पारण कर लें।

  4. विजयादशमी पर जगह-जगह रावण दहन

    इसी तिथि को भगवान राम ने रावण का वध किया गया था। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है। कई जगहों पर रावण का पुतला दहन किया जाएगा।

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