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भारत बंद/ शिवसेना ने बंद में शामिल न होने का कारण बताया, सामना में कहा-ऐसा न लगे कि विपक्ष अभी नींद से जागा है



  • शिवसेना अक्सर बीजेपी की आलोचना करती रहती है।
  • इस बंद में शिवसेना शामिल नहीं है।

Danik Bhaskar

Sep 11, 2018, 03:02 PM IST

मुंबई. शिवसेना ने सोमवार को विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों में इजाफे के खिलाफ बुलाया गया राष्ट्रव्यापी बंद लंबी नींद से हाल में जागे लोगों का अचानक उठाया गया कदम नहीं लगना चाहिए। पार्टी ने बंद में ना शामिल होने के पीछे अपना तर्क दिया है। पार्टी ने कहा कि हम लंबे समय से विपक्षी दलों का बोझ अपने कंधों पर उठाते आ रहे हैं और अब देखना चाहते हैं कि ये संगठन जनता से जुड़े मुद्दों पर कहां खड़े हैं। शिवसेना बीजेपी की सहयोगी पार्टी है, लेकिन वह अक्सर उसकी आलोचना करती है।

 

सामना की संपादकीय में साधा निशाना: पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, ‘अब तक हम विपक्षी नेताओं का बोझ अपने कंधों पर उठाते आ रहे हैं और अब हम विपक्ष की ताकत देखना चाहते हैं। जब विपक्षी पार्टियां प्रभावशाली ढंग से अपना काम कर रही हों तो लोगों के हितों की रक्षा होती है।’ शिवसेना ने कहा कि लोग यह पूछ सकते हैं कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस के बुलाए गए बंद में शामिल होने के बारे में शिवसेना का क्या रुख है। अपने ही सवाल का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी ने कहा कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्षी पार्टियों की शक्ति देखना चाहती है। 

 

ऐसा न लगे कि विपक्ष गहरी नींद से जागा है: संपादकीय में आगे कहा गया है, ‘इस देश के लोग करीब से देख रहे हैं कि कैसे मंहगाई बढ़ रही है और पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा हो रहा है। उम्मीद करते हैं कि बंद इस तरह से ना दिखे कि जनता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष गहरी नींद से जागा है और फिर उसने बंद का आह्वान किया है।’ 

 

चंद्रकांत पाटिल पर साधा निशाना: पार्टी ने महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल पर भी निशाना साधा जिन्होंने कथित रूप से टिप्पणी की थी कि सरकार चलाना कितना मुश्किल है यह समझने के लिए खुद को बीजेपी के नेताओं की जगह रखकर देखना चाहिए। संपादकीय में कहा गया है, ‘पाटिल को पता होना चाहिए कि बीजेपी का नेता होना आम आदमी होने से ज्यादा आसान है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में इजाफे का सीधा असर खाद्यान्न, दूध, अंडे, सार्वजनिक परिवहन जैसी अन्य जरूरी चीजों के मूल्य पर पड़ता है।’ 

 

बीजेपी पर वादे पूरा न करने का आरोप: शिवसेना ने बीजेपी शासित केंद्र सरकार पर चुनावी वायदे पूरे नहीं करने का आरोप लगाकर हमला किया। पार्टी ने कहा, ‘वर्ष 2014 के आम

चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने दो करोड़ नौकरियों का सृजन करने का वादा किया था। इसके विपरीत मोदी शासन में हर साल 20 लाख नौकरियां घट गईं।’ 

 

पार्टी ने कहा, ‘मोदी सरकार जिस तरह से जीडीपी वृद्धि का प्रचार कर रही है, उसी तरह से उसे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में इजाफे का प्रचार भी करना चाहिए।’ 

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