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भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पुलिस को लगाई फटकार

Dainikbhaskar.com | Sep 06, 2018, 04:40 PM IST

महाराष्ट्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि इन कार्यकर्ताओं को नजरबंद रखने से इस मामले की जांच प्रभावित होगी।

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पुणे/दिल्ली: भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में चल रही सुनवाई के दौरान मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कौन होती है ये कहने वाली कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल न दें। कोर्ट ने सरकार को आदेश देते हुए कहा है कि अगली सुनवाई तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन आरोपियों की घर में नजरबंदी जारी रहेगी। सर्वोच्च अदालत ने कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में गिरफ्तार पांचों संदिग्ध मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, प्रोफेसर सुधा भारद्वाज, वरवरा राव, अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वेरनन गोंजाल्विस की नजरबंदी को 12 सितंबर तक आगे बढ़ाने का आदेश दिया है।

आज क्या-क्या कोर्ट में हुआ?
उच्चतम न्यायालय ने पुणे पुलिस के एसीपी के बयानों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा कि वह अदालत पर आक्षेप लगा रहे हैं। उच्चतम न्यायायल ने कहा कि जब मामले की सुनवाई अदालत में रहो रही हो तो महाराष्ट्र सरकार अपनी पुलिस को ज्यादा जिम्मेदार होने का निर्देश दे। महाराष्ट्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि इन कार्यकर्ताओं को नजरबंद रखने से इस मामले की जांच प्रभावित होगी। न्यायालय ने रोमिला थापर समेत अन्य याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह अदालत को संतुष्ट करें कि क्या एक आपराधिक मामले में तीसरा पक्ष हस्तक्षेप कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र पुलिस ने यह कहा: महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि भीमा-कोरेगांव मामले हिंसा मामले में गिरफ्तार पांचों मानवाधिकार कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश में शामिल थे। नोटिस के जवाब में बुधवार को दाखिल हलफनामे में पुलिस ने दावा किया है कि आरोपी अफरा-तफरी मचाने के प्रयास में थे और वह इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती है। महाराष्ट्र पुलिस ने कहा है, "पांचों एक्टिविस्ट प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के एक्टिव मेंबर हैं। इन्हें सरकार से असहमति संबंधी विचारों की वजह से नहीं, बल्कि देश का सौहार्द्र बिगाड़ने की साजिश रचने के ठोस सबूतों के आधार पर पकड़ा गया है। यह प्रचारित किया जा रहा है कि पांचों एक्टिविस्टों को असहमति के आधार पर गिरफ्तार किया गया है, जबकि ऐसा नहीं है।

याचिकाकर्ताओं का आरोपियों से कोई संबंध नहीं: महाराष्ट्र पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर ने 21 पेज के हलफनामे में कहा है कि मामले में याचिकाकर्ताओं का न तो आरोपियों से संबंध है और न ही वह इस मामले में चल रही जांच प्रक्रिया से अवगत हैं। याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए।