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निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को मिली जमानत

राहत: औपचारिकताएं पूरी कर दो साल बाद बुधवार को जेल से होंगे रिहा

Dainikbhaskar.com | Aug 29, 2018, 04:17 PM IST

अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धुर विरोधी माने जाने वाले राज्य के निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में मंगलवार को जमानत दे दी, जिससे उनका लगभग दो साल बाद एक बार फिर जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। रिश्वत का मामला...

 

यह मामला गत नौ मार्च को गुजरात पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)की भावनगर इकाई ने दर्ज किया था। उन्हें मनी लांडरिंग के एक मामले में उसी दिन करीब 20 माह बाद यहां साबरमती सेंट्रल जेल से बाहर कदम रखते ही फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। एक कंपनी के बिल के भुगतान के लिए भावनगर के तत्कालीन कलेक्टर के तौर पर कथित रूप से 25 लाख रुपए की रिश्वत लेने से जुड़े इस मामले में उन्हें भावनगर जेल में रखा गया था।

 

25 हजार के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत

न्यायमूर्ति एजे देसाई की अदालत ने मंगलवार को 25,000 रुपए के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराने तथा अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करते और जमानत के दौरान साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त पर जमानत दी गई है। उनके वकील राजेश एन गोस्वामी ने अदालत में दलील दी थी कि उनके खिलाफ सभी मामले बदनीयती से दर्ज कराए गए हैं। वर्ष 2010 से उनके खिलाफ दस मामले दर्ज हो चुके हैं। ऐसा प्रयास हो रहा है कि वह जेल से बाहर ही नहीं आ सकें। उनके खिलाफ जो मामला दर्ज हुआ है वह प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के वर्षों पुराने बयान पर आधारित है और इस दौरान जेल में रहे शर्मा से बाद में केस दर्ज करने वाली एजेंसी ने कोई पूछताछ भी नहीं की थी। इस मामले में अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान होने और पहले ही आरोपपत्र दायर हो जाने के कारण भी वह नियमित जमानत के हकदार हैं।

 

पद के दुरुपयोग समेत 10 मामले दर्ज हैं

भावनगर की एसीबी की विशेष अदालत में 27 मार्च को उनकी जमानत की अर्जी रद्द होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने ही पिछले माह उन्हें उनके यहां स्थित आवास में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए पांच दिन की अस्थायी जमानत भी दी थी। कलेक्टर समेत कई पदों पर रह चुके प्रदीप शर्मा के खिलाफ पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के 10 मामले दर्ज हैं। अन्य सभी में जमानत मिल जाने के बाद इस अंतिम मामले में भी ऐसा होने से उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। वह औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार को जेल से बाहर आ सकते हैं।

 

नरेंद्र मोदी के करीबी रहे प्रदीप शर्मा की अनबन हो गई थी

भुज के कलेक्टर रह चुके प्रदीप शर्मा को पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता था। बाद में उनकी कथित तौर पर अनबन हो गई। वर्ष 2013 में स्नूपगेट के नाम से कुख्यात एक 35 वर्षीय महिला आर्किटेक्ट की कथित तौर पर सरकार के तंत्र की ओर से जासूसी का मामला मीडिया में उछलने के पीछे भी शर्मा का हाथ होने की बात कही जाती है।

 

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