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प्रोडक्ट की लागत दोगुनी; ट्रांसपोर्टर्स ने अल्टीमेटम दिया-ट्रांसपोर्टेशन कास्ट नहीं बढ़ी तो माल उठाना बंद

Bhaskar News Network | Sep 12, 2018, 02:06 AM IST

पेट्रोल-डीजल के लगातार रेट बढ़ने से उद्योगों की कमर टूट रही है। यहां छोटी-बड़ी करीब साढ़े 24 हजार इंडस्ट्री हैं।...

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पेट्रोल-डीजल के लगातार रेट बढ़ने से उद्योगों की कमर टूट रही है। यहां छोटी-बड़ी करीब साढ़े 24 हजार इंडस्ट्री हैं। इंडस्ट्री रोज करीब 10-12 घंटे चलती है। इसमें राेज ब्रेकडाउन, फॉल्ट, पावर कट व मेंटिनेंस की वजह से 4-5 घंटे जनरेटर चलाना पड़ता है। औसतन एक घंटे यदि बिजली से इंडस्ट्री चलती है तो उसका 100 रुपए का खर्च आता है। वहीं इंडस्ट्री यदि डीजल से चलती है तो यह अंतर दोगुना से भी अधिक हो जाता है। इससे प्रोडक्ट की लागत बढ़ रही है। मार्केट में उत्पाद की कीमत स्थिर है। इससे इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हो रहा है। छोटे उद्योगों का बुरा हाल है। छोटे उद्यमियों का कहना है कि यही हाल रहा तो लघु उद्योग सर्वाइव नहीं कर पाएंगे। उधर ट्रांसपोर्टर्स ने भी कंपनियों को अल्टीमेटम दिया है कि माला भाड़ा की कास्ट बढ़ाई जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे कंपनियों से स्टॉक उठाना बंद कर देंगे।

ऐसे हो रहा नुकसान

हरियाणा में इंडस्ट्री को बिजली करीब 8 से 9 रुपए के आसपास पड़ती है। जिस हिसाब से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़े हैं, उस हिसाब से करीब यह 13-15 रुपए का अंतर आ रहा है। इसका सबसे बुरा असर पेट्रो इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। जिस प्रोडक्ट की वैल्यू 10 रुपए के आसपास थी। अब वह अब दोगुनी हो गई है। ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ने से लागत बढ़ गई है। फिलहाल कंपनियों की ओर से रेट नहीं बढ़ाए गए हैं। जिससे कंपनियों का नुकसान बढ़ता जा रहा है। आशंका है कि बढ़ते दाम व ट्रांसपोर्टेशन के दबाव में दिवाली तक कंपनियां अपने रेट बढ़ा देंगी। इससे महंगाई और बढ़ेगी। इसका सीधा असर आम नागरिक की जेब पर पड़ेगा।

छोटी इंटस्ट्री को हो रहा बड़ा नुकसान

पेट्रोल-डीजल रेट को जीएसटी में लाना चाहिए