Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

अरावली में पर्यावरण को नुकसान पर सख्ती: सुप्रीमकोर्ट ने कांत एंक्लेव को अवैध बताया, दिसंबर तक निर्माण हटाने के आदेश

अरावली स्थित कांत एंक्लेव मामले में मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए कहा कि यह कंस्ट्रक्शन पूरी...

Bhaskar News Network | Sep 12, 2018, 02:06 AM IST
अरावली स्थित कांत एंक्लेव मामले में मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए कहा कि यह कंस्ट्रक्शन पूरी तरह से वन विभाग की जमीन पर है। इसलिए यह पूरी तरह से अवैध है। यह जमीन वापस वन विभाग को दे दी जाए। सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि इसके निर्माण से अरावली क्षेत्र में पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है। सुप्रीमकोर्ट ने 18 अगस्त 1992 के नोटिफिकेशन के बाद के हुए निर्माण को पूरी तरह से अवैध माना है। डीटीपी संजीव मान का कहना है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार जिस विभाग को कार्रवाई के लिए अधिकृत करेगी वह कार्रवाई करेगा। कोर्ट के आदेशानुसार 17 अप्रैल 1984 से 18 अगस्त 1992 तक के निर्माण को नहीं छेड़ा जाएगा।

सुप्रीमकोर्ट के फैसले से परेशान हैं रेजीडेंट्स

सुप्रीमकोर्ट के फैसले से कांत एंक्लेव में रहने वाले रेजीडेंट्स परेशान हैं। पीके गांधी व अजय वधवा का कहना है कि हम लोगों ने बिल्डिंग प्लान के अनुसार नक्शे पास कराकर फ्लैट बनाए हैं। सरकार अवैध काॅलोनियों को बसने से नहीं रोक पा रही है। जो लोग सरकार के नियमानुसार मकान बनाकर रह रहे हैं उन्हें अवैध माना जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार सुप्रीमकोर्ट में सही ढंग से अपना पक्ष रखने में नाकाम है। सुप्रीमकोर्ट के फैसले को देखते हुए सरकार को विकल्प तलाशना चाहिए।

अहम फैसला

वर्ष 2002 में एमसी मेहता ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर कर अरावली को बचाने की गुहार लगाई थी, तभी से यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है

कांत इंक्लेव

कांत एंक्लेव का यह है पूरा मामला

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने अरावली वन क्षेत्र में आर कांत बिल्डर कंपनी को 1984 में 426 एकड़ जमीन पर फ्लैट बनाने का लाइसेंस दिया था। इसमें कुल 1612 प्लाट हैं। वर्ष 1990 में फ्लैट बनने शुरू हुए थे। डीटीपी के मुताबिक वहां कुल 33 मकान बने हैं। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में सीवरलाइन डली हुई है। सड़कें बनी हैं। घरों में बिजली के कनेक्शन भी हैं। बताया जाता है वर्ष 2002 में एमसी मेहता ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर कर अरावली को बचाने की गुहार लगाई थी। तभी से यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। यहां जो फ्लैट बने हैं उनमें सुप्रीमकोर्ट के रिटायर्ड जज समेत बड़े घरानों के फ्लैट हैं।

फार्म हाउस व मैरिज हॉल भी होंगे प्रभावित

मंगलवार को आए सुप्रीमकोर्ट के फैसले का असर अरावली वनक्षेत्र में बने 250 से अधिक फार्म हाउसों और मैरिज हाल पर भी पड़ेगा। कई शिक्षण संस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। डीटीपी संजीव मान का कहना है कि जिस कांत एंक्लेव मामले में सुप्रीमकोर्ट ने फैसला दिया है उसी के आसपास कई बड़े शिक्षण संस्थान, फार्म हाउस व मैरिज हॉल भी बने हुए हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। अरावली क्षेत्र में हुए निर्माणों के मामले में नगर निगम भी लपेटे में आ सकता है। पूरा क्षेत्र नगर निगम सीमा क्षेत्र में आता है।

Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

टॉप न्यूज़और देखें

Advertisement

बॉलीवुड और देखें

स्पोर्ट्स और देखें

Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

जीवन मंत्रऔर देखें

राज्यऔर देखें

वीडियोऔर देखें

बिज़नेसऔर देखें