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पंजे का सुन्न पड़ना है डायबिटिक पेरिफैरल न्यूरोपैथी के लक्षण, शुगर कंट्रोल करें और पैदल चलें

लम्बे समय से डायबिटीज़ होने से इसकी आशंका उतनी ही बढ़ जाती है, ख़ासकर जब ब्लड शुगर नियंत्रण में न हो। 24 से अधिक बीएमआई डायबिटिक न्यूरोपैथी के ख़तरे को बढ़ाता है।

यह नसों से सम्बंधित रोग है जो डायबिटीज़ के मरीज़ों में होता है। ब्लड में शुगर की मात्रा अधिक होने की वजह से नसें डैमेज होने लगती हैं, पैर और पंजे अधिक होते हैं प्रभावित
Danik Bhaskar | Sep 03, 2018, 07:18 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. डायबिटीज़ अपने आप में एक घातक रोग है लेकिन यह अपने साथ और भी कई रोगों को निमंत्रण दे सकता है, जिसमें से एक है डायबिटीक पेरिफैरल न्यूरोपैथी। इसकी शुरुआत पैरों और पंजों मके सुन्न पड़ने से होती है। जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा होने पर तुंरत डॉक्टरी सलाह लें क्योंकि ये गंभीर रूप ले सकता है। डॉ. राजीव पारेख, चेयरमैन, पेरिफैरल वेस्कुलर एंड एंडोवैस्कुलर साइंस विभाग, मेदांता हॉस्पिटल से जानते हैं क्या यह रोग और कैसे करता है प्रभावित....

सवाल : क्या है डायबिटीक पेरिफैरल न्यूरोपैथी?
जवाब : 
यह नसों से सम्बंधित रोग है। यह डायबिटीज़ के मरीज़ों में सामान्य रूप से पाया जाता है। रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होने की वजह से नसें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। सामान्यत: यह पैर और पंजों को अधिक प्रभावित करता है लेकिन यह पूरे शरीर की नसों को क्षति पहुंचा सकता है। रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखकर और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इससे बचा जा सकता है। 
न्यूरोपैथी मुख्यत: 4 प्रकार की होती है। मरीज़ को एक समय पर एक या एक से अधिक प्रकार की डायबिटीक न्यूरोपैथी हो सकती है। 
1. पेरिफैरल न्यूरोपैथी : सामान्यतौर पर यह सबसे ज़्यादा पाया जाता है। यह पंजों और पैर पर पहले असर करता है उसके बाद हाथ और कंधों पर। 
2. प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी : इसे डायबिटीक एमयोट्रॉफी (amyotrophy) भी कहते हैं। इसमें 'myo' शब्द का अर्थ होता है मांसपेशी। इसमें मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं। पैरों की ऊपरी मांसपेशी और कूल्हे की मांसपेशी पर असर होता है। 
3. ऑटोमेटिक न्यूरोपैथी : शरीर से जुड़े ऐसे बहुत से फंक्शन जिनके बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं होती। जैसे दिल का धड़कना, सांस लेना या भोजन पचाना। यह सभी कार्य स्वचलित तंत्रिका तंत्र से क्रियान्वित होते हैं। इस तंत्र की न्यूरोपैथी अधिक ख़तरनाक होती है क्योंकि यह शरीर के अधिकतर भागों पर असर करती है। 
4. फोकल न्यूरोपैथी : उपरोक्त सभी प्रकार की डायबिटीक न्यूरोपैथी पॉलीन्यू्रोपैथी के प्रकार हैं। पॉली का अर्थ होता है कि वे एक से अधिक नसों को प्रभावित करते हैं। वहीं फोकल न्यूरोपैथी किसी विशिष्ट तंत्रिका को प्रभावित करती है। इसे मोनोन्यूरोपैथी भी कहा जाता है। यह अचानक होती है और अधिकतर दिमाग़ में मौजूद उस नस को प्रभावित करती है जो आंखों तक जाती है। यह धड़ और पैरों की नसों पर भी असर कर सकती है। 

सवाल : कैसे पहचानें कि डायबिटीक पेरिफैरल न्यूरोपैथी से हैं परेशान?
जवाब: 
इसके लक्षण डायबिटीज़ के प्रकार और क्षतिग्रस्त नस पर निर्भर करते हैं। पैर या पंजे सुन्न पड़ जाना, पाचन तंत्र बिगड़ना, मूत्र त्याग करने में मुश्किल होना, रक्त वाहिकाओं या हृदय में किसी तरह की परेशानी होना, दर्द महसूस करने की क्षमता कम होना, झुनझुनी या जलन होना, ऐंठन, वज़न कम होना, पैरों में कोई गम्भीर समस्या या संक्रमण, हड्‌डी और जोड़ों में दर्द होना। कुछ लोगों में स्पर्श की संवेदनशीलता भी बढ़ सकती है जैसे चादर का भार भी उनके लिए दर्द देने वाला हो सकता है। 

सवाल: इससे कौन अधिक प्रभावित होता है?
जवाब: 
लम्बे समय से डायबिटीज़ होने से इसकी आशंका उतनी ही बढ़ जाती है, ख़ासकर जब ब्लड शुगर नियंत्रण में न हो। 24 से अधिक बीएमआई डायबिटिक न्यूरोपैथी के ख़तरे को बढ़ाता है। धूम्रपान धमनियों को सिकोड़ता है और कठोर बनाता है। इस कारण पैरों में रक्त का संचार कम होता जाता है, जिससे पैरों की नसों में हुए घावों का भर पाना मुश्किल हो जाता है।

सवाल: इससे कैसे करें बचाव?
जवाब: 
कुछ बातों का ध्यान रखकर इससे बचा जा सकता है।

रक्त में शर्करा के स्तर पर नियंत्रण रखें।  वर्ष में दो बार एचबीए1सी टेस्ट करवाएं, यह रक्त जांच पिछले 2-3 महीनों में ब्लड शुगर के स्तर को दर्शाती है।  पैरों में होने वाली समस्याएं जो अधिक समय से बनी हुई हों तो पैरों की धमनियों के लिए अल्ट्रासाउंड डॉप्लर परीक्षण ज़रूरी है।  पैदल चलें, चलने से शरीर में रक्त संचार दुरुस्त रहता है। 
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