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14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा पोस्ट आॅफिस देखने के लिए लाहौल-स्फीती आएं

हिक्किम पोस्ट आॅफिस की शुरुआत 1983 में हुई थी।

Dainikbhaskar.com | Jul 14, 2018, 05:34 PM IST
हिक्किम पोस्ट आॅफिस की शुरुआत 1983 में हुई थी, रिंचेन शेरिंग पिछले 35 सालों से इस डाकखाने के पोस्टमास्टर हैं यहां मौजूद ताबो मठ को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया है, जिसे अजंता आॅफ हिमालय भी कहा जाता है।

लाइफस्टाइल डेस्क. लाहौल-स्पीती को छोटा तिब्बत भी कहा जाता है। ऐसे लोग शांत व खूबसूरत जगह पसंद करते हैं या एडवेंचरस एक्टिविटीज एंजॉय करना चाहते हैं उनके लिए हिमाचल प्रदेश यह जिला एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां स्कीइंग के अलावा याक सफारी, ट्रैकिंक, रिवर राफ्टिंग और वाइल्ड लाइफ का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। सबसे खास बात जो बेहद कम लोग जानते हैं दुनिया का सबसे ऊंचा पोस्ट आॅफिस यहीं है। ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल चलने के बाद लोग यहां पहुंचते हैं। स्पीति घाटी के बंजर पहाड़ों के बीच स्थित है छोटा सा गांव हिक्किम। इसी गांव में स्थित हिक्किम पोस्ट आॅफिस की शुरुआत 1983 में हुई थी। यहां पहुंचने के लिए शिमला सबसे करीबी रेलवे स्टेशन है जो 160 किलोमीटर की दूरी पर है और सबसे करीबी एयरपोर्ट कुल्लू है जो यहां से करीब 80 किलोमीटर है। इसके अलावा भी लाहौल-स्पीती में कई ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन हैं जो आपको एक अलग दुनिया का अहसास कराते हैं। 

चिट्ठियां पोस्ट करने के लिए आते हैं लोग
यह ऐसा पोस्ट आॅफिस जो कई गांवों के लोगों को दुनिया से जोड़ता है। लोग यहां चिट्ठियां डालने और पैसा जमा करने आते हैं। कई ऐसे सैलानी भी आते हैं जो इस पोस्ट आॅफिस से दूसरे देश संदेश भेजते हैं। रिंचेन शेरिंग पिछले 35 सालों से इस डाकखाने के पोस्ट मास्टर हैं। वो तब से ये पोस्ट ऑफिस चला रहे हैं, जब ये 1983 में खुला था। यह पोस्ट आॅफिस साल में छह माह भारी बर्फबारी के कारण बंद रहता है।

क्यों जाएं और क्या देखें
लाहौल और स्पीती पहले दो अलग-अलग जिले थे जिसे बाद में मिलाकर एक जिला बनाया गया।यहां की वादियां आपको पहाड़ी रेगिस्तान का अहसास कराती हैं। बौद्ध अनुयायियों के कई मठ आपको देखने को मिलेंगे। एडवेंचरस एक्टिविटीज जैसे ट्रैकिंग, रिवर राफ्टिंग और कैंपिंग करना पसंद है जो यहां एक बार जरूर आना चाहिए।

1. ताबो मठ 
ताबो नाम का बौद्ध मठ 1000 साल से भी ज्यादा पुराना होने की वजह से तो जाना ही जाता है। यह भारत और हिमालय का सबसे लम्बे समय से लगातार चल रहा गोम्पा भी है। तिब्बती शैली में बने बौद्ध मठ के भवन को गोम्पा कहते हैं। बडी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक इसे देखने आते हैं। ये जिस गांव में है वो एक कटोरेनुमा आकृति की घाटी में बसा है। इस मठ में नौ मंदिर हैं और 4 स्तूप हैं। 1975 के भूकम्प के बाद दलाई लामा ने इसे दोबारा बनवाने की पहल की और यहां पर एक और नया स्तूप का निर्माण कराया। इसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया है जिसे अजंता आॅफ हिमालय भी कहा जाता है।

2. की-गोम्पा
इस बौद्ध मठ की स्थापना 11वीं शताब्दी में की गई थी। यह लाहौल-स्पीती का सबसे बड़ा मठ है। समुद्र तल से 4166 मीटर पर ऊंचाई पर होने के कारण यहां से पूरे जिले का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। इसके अलावा कुंगरी गोम्पा, गुरु घंटाल गोम्पा,धनकर गोम्स समेत कई मठ देखने को मिलेंगे।

3. फेयर एंड फेस्टिवल्स 
यह जगह कई फेस्टिवल के लिए भी जानी जाती है जैसे पौड़ी फेयर, शेशू फेयर, ट्राइबल फेयर, गोची फेयर, फुगली फेयर। यहां फेस्टिवल आॅफ लाइट को देखना भी यादगार अनुभव साबित होता है। 

4. झील और पार्क 
ताल  लेक, सूरजताल लेक और दशिर लेक आपको यहां दोबारा आने के लिए प्रेरित करेगी। इसके अलावा अगर वाइल्ड लाइफ के शौकीन हैं तो पिन वैली नेशनल पार्क की ओर रुख करें। यहां आपको कई दुर्लभ जानवर जैसे वूली हेयर, तिब्ब्ती गैजेल और स्नो लेपर्ड देखने को मिलेंगे। 

 

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