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सावधान! क्या आप मोबाइल न होने पर भी बॉडी में वाइब्रेशन महसूस करते हैं, जानिए डिजिटल एडिक्शन से जुड़े डिसऑर्डर

रिसर्च के मुताबिक एंजाइटी व फियर ऑफ मिसिंग आउट दो प्रमुख वजहें हैं, जिनके चलते भी युवा बार-बार अपना फोन चेक करते हैं।

DainikBhaskar.com | Sep 03, 2018, 01:12 PM IST

गैजेट डेस्क. युवाओं में टेक्नोलॉजी की लत तेजी से बढ़ती जा रही है। अौसतन वे दिन में 150 बार अपना मोबाइल चेक करते हैं। कॉलिंग के अलावा वे अपने फोन का इस्तेमाल सोशल नेटवर्किंग, गूगल सर्च, एंटरटेनमेंट या फिर एप्स को यूज करने के लिए तो कर ही रहे हैं, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक, एंजाइटी व फियर ऑफ मिसिंग आउट दो प्रमुख वजहें हैं, जिनके चलते भी युवा बार-बार अपना फोन चेक करते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि अब डिजिटल डिवाइसेज रोजमर्रा के कामों को आसान बना रहे हैं, लेकिन इनका लगातार इस्तेमाल करते हुए कब आप इनके आदी हो चुके होंगे आपको पता भी नहीं चल पाएगा। ऐसे में यहां कुछ टर्म्स दिए जा रहे हैं, जो डिजिटल एडिक्शन की डिक्शनरी में शामिल हैं।

 

जानिए कहीं आप भी इनके शिकार तो नहीं-

 

फैड (फेसबुक एडिक्शन डिसऑर्डर): अगर आप फेसबुक पर लगातार पिक्चर्स पोस्ट करने के शौकीन हैं और आपको हमेशा अपने दोस्तों की पोस्ट्स का जरूरत से ज्यादा इंतजार रहता है तो इसका अर्थ है कि फेसबुक एडिक्शन डिसऑर्डर आप पर हावी है। इसके चलते आप अपनी पिक्सर्च की रेटिंग भी दूसरे सोशल मीडिया यूजर्स के रेस्पॉन्स के आधार पर करते हैं।

 

नोमोफोबिया: नोमोफोबिया का अर्थ है मोबाइल खोने, पास न होने या फिर उसका उपयोग न कर पाने का डर। फोन में सिग्नल के न आने या बैटरी लो होने की वजह से अगर आप फिक्रमंद हो उठते हैं तो यह नोमोफोबिया के लक्षण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहां डिवाइसेज से हमारा लगाव हानिकारक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नोमोफोबिया का असर हमारे काम पर भी पड़ता है।

 

सेल्फाइटिस: यह अंधाधुंध सेल्फीज पोस्ट करने से जुड़ा डिसऑर्डर है। अगर आप लगातार सेल्फी लेकर उसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर पोस्ट करते रहते हैं तो संभवत: आप इस डिसऑर्डर की ओर बढ़ रहे हैं। सेल्फिटिस शब्द 2014 में खोजा गया था।


आईजीडी (इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर): अगर आप घंटों कैंडी क्रश, फीफा ऑनलाइन या अन्य गेम्स खेलते हैं तो आईजीडी के बारे में जानना आपके लिए जरूरी है। जरूरत से ज्यादा ऑनलाइन गेम्स खेलने की इच्छा और दूसरे सोशल मीडिया यूजर्स को गेम के लिए रिक्वेस्ट भेजने की आदत होने का मतलब है कि आप इस डिसऑर्डर से पीडित हैं। 
 

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम: फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम (पीवीएस) एक ऐसा डिसऑर्डर है, जिसमें बिना फोन के बजे हमेशा वाइब्रेशन का अहसास होता है। ऐसा फोन के नहीं बजने पर भी होता है। दरअसल, किसी भी कॉल या मैसेज के मिस होने के डर के चलते हम जरूरत से ज्यादा सजग होते हैं और बिना वाइब्रेशन के भी वाइब्रेशन की आवाज महसूस करते हैं। जबकि, मेंटल हेल्थ के लिहाज से यह ठीक नहीं है।

 


फोमो (फियर ऑफ मिसिंग आउट): फियर ऑफ मिसिंग आउट का अर्थ है सोशल मीडिया पर कुछ भी छूट न जाए। अगर आप लगातार सोशल मीडिया चेक किए बिना नहीं रह सकते, सोशल मीडिया की हर एक अपडेट पर लाइक, कमेंट या उसे शेयर करने के लिए हमेशा उतावले रहते हैं और बिना समय लगाए तुरंत ऐसा करना चाहते हैं तो संभावना है कि आप फोमो के शिकार हैं। 


 
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