जीने की राह / अपने बचपन का भोलापन बनाए रखें

  • जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2018, 10:59 PM IST

जब तक हम सीख रहे होंगे, तब तक बूढ़े नहीं हो पाएंगे और जब तक काम करते रहेंगे, जवान बने रहेंगे। उम्र के इन दोनों पड़ावों से गुजरना सभी को है। यदि भगवान किसी को बीच में न उठाए तो सभी को जवान भी होना है, बुढ़ापे से भी गुजरना है।

उम्र के इन पड़ावों से पहले आता है बचपन और इसकी विशेषता होती है भोलापन। ऊपर वाला हर मनुष्य के भीतर एक भोलापन छोड़ता है और इंसान दुनियादारी से निपटकर जब वापस ऊपर वाले के पास लौटता है तो एक सवाल उससे जरूर पूछा जाता है कि जो भोलापन हमने तुम्हारे जन्म के समय दिया था, वह मृत्यु के बाद लौटाया कि नहीं?

हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं है, पर ऊपर वाले की यह वार्ता हमारे लिए बहुत बड़ा संदेश है। अपने भीतर का भोलापन बचाकर रखें तो युवा अवस्था बहुत परिपक्व हो जाएगी और बुढ़ापा मजबूर नहीं रहेगा। कैसे बचाएंगे इस भोलेपन को? आजकल तो बचपन भी वक्त से पहले खत्म हो जाता है और उसी के साथ भोलापन भी चला जाता है।

भोलापन बनाए रखने के लिए पहला काम यह करें कि परमात्मा के प्रति भरोसा रखिए। दो, मदद की वृत्ति बनाएं। तीन, शांत रहें। चार, अहंकार बिल्कुल न पालें और इन सबसे जरूरी है अपेक्षा रहित हो जाएं। किसी से उम्मीद न रखें या कम रखें। दूसरों से लगाई गई उम्मीद इंसान को बहुत अशांत करती है। ये पांच काम करने से आपके भीतर का भोलापन बचेगा, फिर हर उम्र में इस भोलेपन के साथ बाहर अपनी योग्यता का उपयोग कर सकेंगे..।

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