पंजाब / गिले-शिकवे मिटाने केपी के घर पहुंचे कैप्टन, फिर साथ लेकर कराया चौधरी संतोख सिंह का नामांकन

  • जालंधर लोकसभा की उम्मीदवारी नहीं मिलने औरवाल्मिकी समाज के नेता चंदन ग्रेवाल के कांग्रेस में आने से नाराज थे पूर्व सांसदकेपी
  • राजनीतिक कत्ल के आरोप के बाद 15 दिन में रही अकाली दल या भाजपा में जाने कीचर्चा
  • अब बोले-कांग्रेस में ही रहूंगा, पार्टी ने जो किया ठीक किया और जो करेगी ठीक ही करेगी

Dainik Bhaskar

Apr 22, 2019, 02:16 PM IST

जालंधर. जालंधर के निवर्तमान सांसद चौधरी संतोख सिंह ने सोमवार को नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन खुद को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए नामांकित किया। इस दौरान जहां संतोख सिंह के साथ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी नजर आए, वहीं उन्हें टिकट मिलने के बाद नाराज चल रहे पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी भी गिला-शिकवा भुलाकर साथ खड़े नजर आए। बताया जाता है कि है केपी को खुद कैप्टन ने मनाया है और संतोख सिंह की विनती पर वह खुद केपी को नामांकन के दौरान लेकर पहुंचे।

यह था केपी की नाराजगी का कारण

मोहिंदर सिंह केपी खुद को जालंधर लोकसभा सीट से उम्मीदवारी नहीं मिल पाने की वजह से पार्टी के नेतृत्व से नाराज थे। वह कई दिन दिल्ली में भी रहे। केपी ने यहां तक भी कह डाला था कि पार्टी ने उनका राजनीतिक कत्ल किया है। वाल्मिकी समाज के नेता चंदन ग्रेवाल के कांग्रेस में आने और आदमपुर हलके पर दावे से भी केपी समर्थकों में नाराजगी थी। ऐसे में केपी को लेकर पिछले 15 दिन में यह चर्चा भी रही कि वह अकाली दल या भाजपा में जा सकते हैं। उन्हें भाजपा की तरफ से होशियारपुर सीट से भी ऑफर की चर्चा रही। एक दिन पहले यह भी बात उठी कि केपी आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं।

आखिर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें मना ही लिया। सोमवार दोपहर साढ़े 12 बजे चौधरी संतोख सिंह ने कैप्टन और केपी दोनों के साथ मिनी सचिवालय पहुंचकर कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके कवरिंग कैंडिडेट के रूप में विक्रम सिंह चौधरी ने नामांकन पत्र दाखिल किया है।

नामांकन से पहले केपी के घर पहुंचे कैप्टन

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह चौधरी संतोख सिंह के नामांकन से पहले मोहिंदर सिंह केपी के घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की। जब कैप्टन केपी के घर पहुंचे तो पूर्व सांसद ने हंसकर उन्हें गले लगा लिया। इस दौरान उन्होंने पूर्व सांसद की नाराजगी दूर की। इससे पहले रविवार को केपी ने कहा था कि पार्टी हाईकमान से बात हो गई है और वह कांग्रेस में ही रहेंगे। पार्टी ने जो किया ठीक किया और जो करेगी ठीक ही करेगी।

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