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विशेष / एकाएक राजस्थान की राजनीति में सक्रिय हुए योग गुरु बाबा रामदेव का इंटरव्यू

इंटरव्यू के दौरान बाबा रामदेव के साथ बाबा बालकनाथ (बाएं) व सुमेधानंद (दाएं)।

  • भास्कर : क्या आपने अलवर से बालकनाथ और सीकर से सुमेधानंद को टिकट दिलाया?
  • रामदेव : मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं बोलूंगा, इन दोनों साधुओं से ही मेरे आत्मा के रिश्ते हैं

Dainik Bhaskar

Apr 18, 2019, 10:13 AM IST

जयपुर (बाबूलाल शर्मा/सौरभ भट्‌ट).योगगुरु स्वामी रामदेव दो दिन से जयपुर में हैं। एक दिन पहले वे पहली बार किसी प्रत्याशी के नामांकन में शामिल हुए। जयपुर कलेक्ट्रेट में भाजपा के जयपुर ग्रामीण से उम्मीदवार राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ का पर्चा भरवाया। मंगलवार को वे वैशालीनगर में एक शिष्य के निजी आवास पर थे। उनके साथ अलवर के भाजपा प्रत्याशी बाबा बालकनाथ और सीकर प्रत्याशी स्वामी सुमेधानंद भी मौजूद थे। एकाएक राजस्थान की राजनीति में सक्रिय हुए रामदेव से दैनिक भास्कर ने की विशेष बातचीत। भास्कर ने रामदेव से टिकट वितरण में उनके हस्तक्षेप सहित वे सभी सवाल किए जो सियासी गलियारों में गूंज रहे हैं...

सवाल- आपका एक बयान आया था कि कालेधन पर कार्रवाई को लेकर आप संतुष्ट नहीं है। ऐसा क्यों कहा था?
जवाब- अभी तो आज का बयान लिखो न। पीछे क्या दिया था, क्या नहीं, थोड़ा लंबा हो जाएगा। (...जोर से ठहाका लगाते हैं फिर कहते हैं..) अभी मामला गंभीर है ना, चुनाव का माहौल है।... अभी मैं जो बोला उतना ही काफी है। (...इतना कहकर फिर हंसते हैं)

सवाल-अलवर में बाबा बालकनाथ, सीकर में स्वामी सुमेधानंद को आपने टिकट दिलाया?

जवाब-देखो भाई, इस बारे में तो अभी मैं कुछ नहीं कहूंगा। ...अपने दोनों तरफ बैठे अलवर व सीकर से भाजपा प्रत्याशियों के कंधों पर हाथ रख कर बोले- पूज्य बालकनाथजी व पूज्य सुमेधानंदजी के साथ में हमारे आत्मा के रिश्ते हैं।

सवाल-राजस्थान में जब भी चुनावी टिकट वितरण की बात होती है, किसी न किसी को लेकर यह आता है कि ये बाबा की तरफ से दावेदार हैं। कितनी सच्चाई है?
जवाब-(मुस्कराते हुए) भाई! यह पार्टियों के नेतृत्व का काम होता है। हम अपना संबंध निभाते हैं। बस, इससे ज्यादा बोलना ठीक नहीं है। (एक बार फिर हंसते हैं)।

सवाल- जयपुर ग्रामीण से राज्यवर्द्धन के नामांकन में आए। एेसा पहली बार किया आपने, क्या भाजपा के प्रचार के लिए खुलकर आ रहे हैं?

जवाब- राज्यवर्द्धन छोटे भाई की तरह हैं। दो-तीन दिन में बात होती रहती है। भाई बोला स्वामीजी आपके आशीर्वाद की जरूरत है, आशीर्वाद देने आओ। मैंने पहली बार देखा कि चुनाव में पर्चा कैसे भरते हैं। प्रचार की बात है तो वेद में पढ़ा है- माता भूमि: पुत्रोअहं पृथ्विया:। यानी ये धरती हमारी माता है। देश पर संकट देखते हैं, तो हम राजनीतिक राय भी रखते हैं।

सवाल- आप कहते हो कि साधु की जाति नहीं होती है। फिर राज्यवर्द्धन की सभा में खुद के यादवों में जन्म होने की बात क्यों की?

जवाब-मैंने कहा- मैं श्रीकृष्ण के यदुवंश में जन्मा हूं, तो क्या गलत कहा। भगवान कृष्ण की तो सारा देश पूजा करता है कोई यादव ही थोड़ी करते हैं। मैं भी एक जाति में हूं लेकिन भाई सब जात वाले इकट्‌ठे होकर रहो और राज्यवर्द्धन को जिताओ। राज्यवर्द्धन व सुमेधानंदजी सबके हैं।

सवाल- आप बताइए कि राजस्थान में राज्यवर्द्धन, बालकनाथ और सुमेधानंद की ही बात करेंगे या और किसी का भी प्रचार करेंगे।

जवाब-अभी तो पीपी चौधरी को भी आशीर्वाद देने जा रहा हूं। अरे घणे हैं। ये जो सामणे दीखे, उतणे ही थोड़े हैं।

सवाल- कालाधन के खिलाफ आपने हमेशा बिगुल बजाया है। आपको मोदी सरकार से कितनी संतुष्टि है? क्या कालेधन पर प्रभावी अंकुश लग पाया है?
जवाब- बहुत हद तक मोदी सरकार ने इसके लिए कार्य किया। कम से कम आगे से कालाधन जनरेट न हो, इस पर अंकुश लगा दिया। देश की आंतरिक व्यवस्था का कालाधन बहुत मात्रा में बाहर निकाला। बाहर से भी कालाधन कुछ मात्रा में आया। अभी भी बहुत कुछ आना शेष है।

सवाल- नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी में क्या फर्क है? किसे प्रधानमंत्री देखना पसंद करेंगे?
जवाब- मोदी को गरीब घर में जन्म लेने से लेकर सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक समझ है। दूसरा वह व्यक्ति है जो बड़े खानदान में पैदा हुआ है। मोदी ने सेवा से लेकर आंदोलनों तक जीवन के सारे ऊंचे-नीचे अनुभव किए हैं। राजनीतिक अनुभव में राहुल और मोदी में जमीन-आसमान का फर्क है। मोदी को एक एमएलए से लेकर सीएम, एमपी से लेकर पीएम तक पहुंचे हैं। राहुल हैं जो अभी सीख रहे हैं। राहुल को अपने आप को इन सारे मुकामों पर प्रमाणिक साबित करना बाकी है।

सवाल- महागठबंधन के कई नेता कह रहे हैं कि गडकरी मोदी को रिप्लेस कर देंगे?
जवाब- पहली बात तो यह है कि इन बातों का अभी वक्त है नहीं। शायद काउंटिंग के बाद ऐसी कुछ बातें होंगी तो उसका कोई अर्थ होगा। अभी तो कन्फ्यूजन पैदा करने के लिए, या अपनी मंशा व्यक्त करने के लिए ऐसी बातें लोग कर रहे हैं। मोदी और गडकरी दोनों ही बहुत योग्य व्यक्ति हैं। मुझे लगता है कि अभी इस विषय पर चर्चा अप्रासंगिक है।

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