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राजस्थान/ कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों ने भाजपा के गढ़ ढहाए

अमीन कागजी, जाहिदा खान व हाकम अली (लेफ्ट टू राइट)।

  • मुस्लिम उम्मीदवार कांग्रेस को मुफीद आए, 14 में से 7 को मिला वोटर का साथ
  • रामगढ़ सीट से भी उतारा था मुस्लिम कैंडिडेट, लेकिन बसपा प्रत्याशी की मौत के कारण चुनाव हो गया स्थगित

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2018, 01:00 AM IST

जयपुर. विधानसभा चुनावों में भाजपा का हिन्दुत्व कार्ड चाहे कामयाब नहीं रहा हो, लेकिन मुसलमान उम्मीदवारों पर दांव खेलने की कांग्रेस की रणनीति जरूर रंग लाई। इस चुनाव में आठ मुसलमान विधायक चुने गए हैं, जिनमें सात कांग्रेस के और एक बसपा का है। चुनाव में कांग्रेस से 14 मुस्लिम उतरे थे जिनमें से आधे सात चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

 

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चुनावों में कांग्रेस ने पंद्रह मुसलमानों को टिकट दिए थे। लेकिन, रामगढ़ सीट पर चुनाव स्थगित हो जाने के कारण 14 मुसलमान उम्मीदवार ही मैदान में बचे। वहीं भाजपा ने केवल एक मुसलमान टोंक से युनुस खां को टिकट दिया, जो कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट से चुनाव हार गए। लेकिन, कांग्रेस के 14 में सात मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे। इनमें फतेहपुर से हाकम अली, किशनपोल से अमीन कागजी, आदर्श नगर से रफीक खान, कामां से जाहिदा, सवाईमाधोपुर से दानिश अबरार, पोकरण से सालेह मोहम्मद और शिव से अमीन खां चुनाव जीत गए। जबकि बसपा के टिकट पर नगर सीट से वाजिब अली विजयी रहे।

 

1952 जैसा संयोग : जयपुर से दो मुस्लिम प्रत्याशी जीते

इस बार खासियत यह भी है कि 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में मात्र दो मुसलमान विधायक जयपुर-ए से शाह अलीमुद्दीन और कामां से मो. इब्राहिम कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। इस बार जयपुर से कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। जयपुर के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। कामां से कांग्रेस की जाहिदा विधायक बनी हैं। पिछले विधान सभा चुनावों से राजस्थान में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत न्यून रह गया था। 200 सीटों वाली विधानसभा में युनुस खां और हबीबुर्रहमान मात्र दो ही मुसलमान विधायक थे। जो दोनों ही भाजपा के थे। इस बार हबीबुर्रहमान पार्टी बदलकर कांग्रेस में चले गए। कांग्रेस ने उन्हे नागौर से टिकट भी दिया लेकिन वे चुनाव हार गए। राजस्थान की आबादी में मुसलमान करीब दस फीसदी हैं। प्रदेश की करीब 30 विधान सभा सीटों पर इनकी भूमिका निर्णायक मानीजाती है। लेकिन पिछली विधान सभा में प्रतिनिधित्व में मुसलमान उसी दो की न्यूनतम संख्या पर चला गया था जहां से 1952 में उसका सियासी सफर शुरू हुआ था। एक मुख्यमंत्री बरकतुल्ला खां सहित अब तक करीब 90 मुसलमान विधायक चुने जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या कांग्रेस के विधायकों की है। सबसे ज्यादा 13 मुसलमान विधायक 1998 में चुने गए थे।1952 जैसा संयोग : जयपुर से दो मुस्लिम प्रत्याशी जीते इस बार खासियत यह भी है कि 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में मात्र दो मुसलमान विधायक जयपुर-ए से शाह अलीमुद्दीन और कामां से मो. इब्राहिम कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। इस बार जयपुर से कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। जयपुर के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। कामां से कांग्रेस की जाहिदा विधायक बनी हैं। पिछले विधान सभा चुनावों से राजस्थान में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत न्यून रह गया था। 200 सीटों वाली विधानसभा में युनुस खां और हबीबुर्रहमान मात्र दो ही मुसलमान विधायक थे। जो दोनों ही भाजपा के थे। इस बार हबीबुर्रहमान पार्टी बदलकर कांग्रेस में चले गए। कांग्रेस ने उन्हे नागौर से टिकट भी दिया लेकिन वे चुनाव हार गए। राजस्थान की आबादी में मुसलमान करीब दस फीसदी हैं। प्रदेश की करीब 30 विधान सभा सीटों पर इनकी भूमिका निर्णायक मानीजाती है। लेकिन पिछली विधान सभा में प्रतिनिधित्व में मुसलमान उसी दो की न्यूनतम संख्या पर चला गया था जहां से 1952 में उसका सियासी सफर शुरू हुआ था। एक मुख्यमंत्री बरकतुल्ला खां सहित अब तक करीब 90 मुसलमान विधायक चुने जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या कांग्रेस के विधायकों की है। सबसे ज्यादा 13 मुसलमान विधायक 1998 में चुने गए थे।

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