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राजस्थान/ दो महीने के बेटे को डॉक्टरों ने बताया बेटी, 10 साल बाद सर्जरी से बदलेंगे जननांग

  • हार्मोन के असंतुलन से ही बार-बार हो रहा था बीमार
  • इस स्थिति में जननांग के मुताबिक नहीं होते हार्मोन

Dainik Bhaskar | Sep 19, 2018, 06:10 PM IST

बीकानेर. सुजाता (बदला हुआ नाम) का दो महीने का बेटा जन्म के बाद से ही बार-बार बीमार हो रहा था। उसे उल्टी-दस्त होते थे। बीकानेर के डॉक्टर सामान्य इलाज करते रहे। तबीयत बिगड़ती गई तो हार्मोन की जांच करवाई। इससे पता चला कि वह एक अंग को छोड़कर पूरी तरह लड़की है। Advertisement

महिला और पुरुष में भेद करने वाले हार्मोंस का संतुलन बिगड़ा

  1. माता-पिता को चिंता हुई तो वे बच्चे को डॉक्टर के पास ले गए। बच्चे का इलाज करने वाले डॉ. जीएस तंवर ने बताया कि इस स्थिति को कंजीनाइटल एड्रिनल हाइपर प्लेजिया (सीएएच) कहते हैं। इसमें महिला और पुरुष में भेद करने वाले हार्मोंस का संतुलन बिगड़ जाता है। 

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  2. बीमारी पकड़ में आने पर उसी मुताबिक इलाज हुआ। उसे ग्लूकोकार्टिसोइड हार्मोन दिया गया। यह अनावश्यक रूप से बढ़ रहे हार्मोंस को नियंत्रित कर रहा है। इससे हाइपर प्लेजिया भी कम हो रहा है। 

  3. डॉक्टरों ने बच्चे के माता-पिता को बताया कि उनके शिशु के अंदर मौजूद हार्मोंस बताते हैं कि वह मूल रूप से लड़की है और लड़की की तरह ही विकसित होगा, स्वस्थ जीवन जिएगा। 

  4. डॉक्टरों ने बताया कि जब वह बच्चा 10 साल का हो जाएगा तो उसके पुरुष जननांग को ऑपरेशन से हटाकर वहां स्त्री जननांग बना दिया जाएगा। 

  5. सीएएच उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें जननांग शरीर की अंदरूनी स्थिति से भिन्न होता है। ऐसा मिनरलोकोर्टिसॉइड्स, ग्लूकोकोर्टिसॉइड्स या सेक्स स्टेरॉइड्स हार्मोन-एंजाइम का प्रवाह या उत्पादन अनुपात बिगड़ने से होता है।

  6. छह महीने में ऐसा तीसरा मामला

    इनमें से एक मामला उत्तरप्रदेश का था। 14 साल का लड़का कैंसर का इलाज करवाने वहां से बीकानेर आया था। डॉ. जितेंद्र नागल ने बताया कि इलाज के बाद उसका कैंसर ठीक हो गया। अब वह खुद को हालात के मुताबिक ढाल रहा है। तीसरे बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। 

  7. सवाल-जवाब

    क्या यही बच्चे बनते हैं समलैंगिक?

    डॉ. तंवर: ऐसा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि ये लोग बाहर से दिखने में जो होते हैं, अंदर से उसके विपरीत होते हैं। वे वास्तव में प्रतिकूल लिंग की तरफ ही आकर्षित हो रहे होते हैं, लेकिन हमें समलैंगिक लगते हैं।

  8. क्या ऐसी बीमारी से ही समलैंगिक होते हैं?

    डॉ. तंवर: बिलकुल नहीं। यह सिर्फ एक वजह है। इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं।

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