- पितरों को समर्पित है तिलतर्पण पुरी शहर, यहां किए जाते हैं श्राद्ध और तर्पण
Dainik Bhaskar
Sep 01, 2019, 04:54 PM ISTजीवन मंत्र डेस्क। 2 से 12 सितंबर तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान घर-घर में गणेशजी की प्रतिमा विराजित की जाती है, भक्त मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं। आमतौर पर हर मंदिर में भगवान गणपति की गजमुखी प्रतिमा ही दिखाई देती है, लेकिन तमिलनाडु के तिलतर्पण पुरी में आदि विनायक मंदिर है, जहां गणेशजी की नरमुखी प्रतिमा के दर्शन होते हैं। यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार ये एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां नरमुखी गणेशजी की मूर्ति स्थापित है।
ये है पितरों का शहर
इस शहर का नाम तिलतर्पण पुरी है और ये पितरों को समर्पित है। यहां दूर-दूर से लोग श्राद्ध कर्म और तर्पण करने आते हैं। पितरों के लिए ही तिल तर्पण किया जाता है। तिलतर्पण पुरी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला- तिलतर्पण और दूसरा पुरी। तिलतर्पण का अर्थ होता है- पूर्वजों को तिल चढ़ाना और पुरी का अर्थ है- शहर, यानी ये शहर पूर्वजों को समर्पित है।
कहां स्थित है ये मंदिर
तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले में कुटनूर शहर है। ये तिरुवरुर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तमिलनाडु में देवी सरस्वती का एकमात्र मंदिर कूटनूर में है। कूटनूर से करीब 3 किमी दूर तिलतर्पण पुरी स्थित है। इस शहर में आदि विनायक मंदिर है। यहां पर पितृ दोष की शांति के लिए पूजा विशेष रूप से की जाती है। यहां भगवान शिव का भी मंदिर है।