व्रत-त्योहार / गौवत्स द्वादशी पर गाय और बछड़े की पूजा से शुरू हो जाता है लक्ष्मी पर्व

  • भविष्य पुराण के अनुसार गाय में लक्ष्मीजी सहित कई देवी-देवताओं का वास होता है

Dainik Bhaskar

Oct 22, 2019, 06:46 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है। हिन्दू मान्यताओं और धर्म ग्रंथों के अनुसार ये महत्त्वपूर्ण व्रत और त्योहारों में एक माना गया है। इस दिन गाय तथा उनके बछड़ों की सेवा की जाती है। महिलाओं द्वारा ये व्रत अपने परिवार की समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से किया जाता है।

  • गाय को लक्ष्मी स्वरूप माना जाता है। गाय की पूजा से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। इसलिए कई जगहों पर इस दिन गाय की पूजा के साथ ही लक्ष्मी पर्व की शुरूआत हो जाती है। इस बार ये व्रत 25 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा। कई जगहों परये व्रत भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि पर भी किया जाता है।

  • कैसे किया जाता है ये व्रत

इस दिन अगर कहीं गाय और बछड़ा नहीं मिल पाए तो चांदी या मिट्टी से बने बछड़े की पूजा भी की जा सकती है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर नित्यकर्म कर लेती हैं। इसके बाद दिनभर में किसी शुभ मुहूर्त में गाय और उसके बछड़े की पूजा करती हैं। इसके साथ ही गाय को हरा चारा और रोटी सहित अन्य चीजें खिलाकर तृप्त किया जाता है। कई जगहों पर गाय और बछड़े को सजाया जाता है। इस दिन गाय का दूध और उससे बनी चीजें नहीं खाई जाती है। इस दिन घरों में खासतौर से बाजरे की रोटी‍ और अंकुरित अनाज की सब्जी बनाई जाती है। इस दिन गाय की दूध की जगह भैंस के दूध का उपयोग किया जाता है।

  • भविष्य पुराण में गौ महिमा

भविष्य पुराण के अनुसार गाय को माता यानी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। गौमाता के पृष्ठदेश में ब्रह्म का वास है, गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं और रोमकूपों में महर्षिगण, पूंछ में अनंत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगादि नदियां, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र विराजित हैं।

  • गोवत्स द्वादशी का महत्व

महिलाओं द्वारा ये व्रत और पूजा की जाती है। द्वादशी तिथि पर गाय और बछड़े की पूजा करने से महिलाओं को संतान सुख प्राप्त होता है। ये पूजा संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए किया जाता है। पुराणों में इस व्रत का माहात्म्य बताते हुए कहा गया है कि बछ बारस के दिन जिस घर की महिलाएं गौमाता का पूजन-अर्चन करती हैं। उसे रोटी और हरा चारा खिलाकर उसे तृप्त करती है, उस घर में मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है और उस परिवार में कभी भ‍ी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इसीलिए महिलाएं गोवत्स द्वादशी पर्व मनाती है।

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